लापरवाही के बेसमेंट में युवराज डूबते गए, सिस्टम सोता रहा
रंजीता सिंह
गाजियाबाद। नोएडा के रहने वाले युवराज मेहता निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे में पानी में डूबते रहे और सिस्टम सोता रहा। सही समय पर जानकारी देने के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। यह सिस्टम का बहुत बड़ा फेलियर है। युवराज को बचाने के लिए पहुंचे सिस्टम के रखवाले तमाशगीन बने रहे और 27 साल के इंजीनियर सबके डूब गए। पिता राजकुमार मेहता की आंखों ने बेटे को अपने सामने दम तोड़ते देखा, वह रोए चिल्लाए पर बेबसी के आगे कुछ ना कर सके।
इस तरह बेसमेंट में पानी भरने की बात कोई नई नहीं है। अधिकतर निर्माणाधीन साइट पर बेसमेंट को मानक से अधिक खोदकर मिट्टी निकाली जाती है और फिर उसे बेच दिया जाता है। निर्माण लेट होने पर उसमें बारिश का पानी भरने लगता है। ऐसे में कई बार यह छोटे तालाब का रुप ले लेता है। गाजियाबाद में इसकी वजह से कई घटनाएं हो चुकी हैं, हालांकि इसमें अभी तक किसी की जान नहीं गई।
सिद्धार्थ विहार की प्रतीक ग्रांड सोसायटी में हर साल बारिश होने पर बेसमेंट में पानी भर जाता है। पिछले साल जुलाई में पास की दूसरी साइट की बेसमेंट की खुदाई अधिक करने पर उसमें बने गढ्डे में पानी भर गया। अधिक बारिश होने पर पानी की अधिक मात्रा होने पर प्रतीक के निचले बेसमेंट और पास में बने नाले की दीवार टूट गई। इससे पूरे बेसमेंट में नाले का गंदा पानी भर गया। इसे लेकर कई दिनों तक प्रदर्शन चला। नेता, अधिकारी तक पहुंचे। मर्सिडीज से लेकर कई महंगी गाड़ियां इसमें खराब हो गईं। जिसके लिए निवासियों ने कई बार मुआवजे की मांग की, लेकिन अभी तक मामला लंबित है।
क्रॉसिंग रिपब्लिक के सुशांत एक्वालिस सोसायटी में बेसमेंट की अधिक खुदाई से बारिश होने पर पास की जमीन धंस गई। जिसमें पांच गाड़ियों तक कई दुपहिया वाहन धंस गए। बिल्डर पर एफआईआर हुई। नोटिस हुआ, हालांकि अभी तक 20 फीट हुए गड्ढे को भरा नहीं जा सका है।
राजनगर एक्सटेंशन में रेड एप्पल सोसायटी का काम विवाद के चलते काफी समय से बंद पड़ा है। इसमें आठ फ्लोर बनकर तैयार हो चुके हैं, उसके बाद काम रुका हुआ है। बारिश होते ही इसके बेसमेंट में पानी भर जाता है। जिससे आसपास की सोसायटियों में जहां लोग मक्खी-मच्छर से परेशान होते हैं। वहीं किसी अनहोनी की आशंका भी सताती रहती है। इस बार भी बारिश में पानी भरने पर लोगों के विरोध पर नगर निगम ने पानी निकाला था। यह हाल यहां हर साल होता है।
इस संबंध में राजनगर एक्सटेंशन फेडरेशन ऑफ सोसायटीज के महासचिव अभिनव त्यागी का कहना है कि बेसमेंट की खुदाई कर उन्हें छोड़ना यह बिल्डरों के लिए आम बात हो गई। वह मिट्टी बेचते हैं और अधिकतर जगह मानक से अधिक खुदाई होती है। आप देखने जाएंगे तो शहर में ऐसी दर्जनों सोसायटियां मिल जाएंगी। इसी लापरवाही के कारण युवराज की जान गई, अगर वहां पानी न भरा होता तो वह बच सकते थे। प्रशासन या प्राधिकरण न इन बातों की जांच करते और न ही इसे गंभीरता से लेते हैं। आरईएएक्स के दीपांशु मित्तल कहते हैं कि भ्रष्टाचार के कारण सब अनदेखी की जाती है। युवराज की जहां मौत हुई। वहां एक मॉल का बेसमेंट बनाने के लिए 70 फीट गड्ढा खोदा गया था, जिसमें पानी भरा था तो सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर वहां पानी कबसे और क्यों भरा था। बिल्डर ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया। क्या यह पानी बरसात के समय का भरा था या किसी सीवर या नाले का था। इन बातों के जवाब मिलने चाहिए और अन्य निर्माणाधीन सोसायटियों के बेसमेंट की भी जांच होनी चाहिए। प्रशासन की घोर लापरवाही और जिम्मेदारों के सामने हुई युवराज की मौत बेहद दुखद है।
प्रतीक ग्रांड में कई दिनों तक भरा रहा नाले का गंदा पानी
सिद्धार्थ विहार की प्रतीक ग्रांड सोसायटी में जुलाई में कई दिनों तक नाले का गंदा पानी भरा हुआ था, लेकिन प्रशासन की लापरवाही देखिए कि बड़े पाइप न होने की वजह से पानी समय से नहीं निकाला गया। गाजियाबाद एनडीआरएफ के पास भी 80 एचपी के पाइप नहीं थे। इसके लिए आसपास के जिलों और राज्यों से संपर्क किया गया। तब एक पाइप आया और पानी कई दिनों बाद निकला।