गाजियाबाद। यशोदा मेडिसिटी ने हैश ए मैच दैट सेवसलाइव्ज नामक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को स्टेम सेल डोनेशन के महत्व और जीवन बचाने में बकल स्वाब टेस्ट की भूमिका के बारे में जागरूक करना रहा। डाटरी स्टेम सेल डोनेशन रजिस्ट्री और जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के साथ मिलकर आयोजित इस अभियान में आसपास की आवासीय सोसायटियों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अ​धिकारी अभिनव गोपाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर रक्त विकारों से जूझ रहे कई मरीजों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपचारात्मक विकल्प होता है। हालांकि, 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों को अपने परिवार के भीतर उपयुक्त डोनर नहीं मिल पाता। इसके अलावा, असंबंधित डोनर से मेल मिलने की संभावना भी अत्यंत कम, लगभग 10,000 में एक ही होती है, क्योंकि इसके लिए ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन का अत्यधिक सटीक मेल आवश्यक होता है। ऐसे में मरीजों और संभावित डोनर्स के बीच की दूरी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इस अभियान के माध्यम से लोगों को यह जानकारी दी गई कि जीवन बचाने की दिशा में पहला कदम एक साधारण बकल स्वाब टेस्ट हो सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, त्वरित और बिना किसी दर्द के होती है। अभियान के दौरान स्टेम सेल डोनेशन को लेकर फैली आम गलतफहमियों को दूर करने और लोगों को सही जानकारी के साथ आगे आने के लिए प्रेरित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके तहत यशोदा मेडिसिटी, इंदिरापुरम और यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी में विशेष जागरूकता एवं पंजीकरण बूथ लगाए गए। यहां लोगों ने स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराया, बकल स्वाब सैंपल दिए और विशेषज्ञ चिकित्सकों से बातचीत कर यह समझा कि एक छोटा-सा, सोच-समझकर लिया गया निर्णय भविष्य में किसी मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
इस अभियान के दौरान स्वास्थ्यवार्ताओं और पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया। इनमें थैलेसीमिक्स इंडिया एवं थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन की सचिव सुश्री शोभा तुली, डाटरी की नॉर्थ इंडिया हेडबिंदिया साहनी सहित स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक जागरूकता क्षेत्र के अन्य प्रमुख विशेषज्ञों ने सहभागिता की। वक्ताओं ने भारत में स्टेम सेल डोनर इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने, समय पर उपयुक्त डोनर मिलने से मरीजों के उपचार परिणामों में होने वाले सकारात्मक बदलाव, तथा दीर्घकालिक जन-जागरूकता की अहम भूमिका पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
अभियान के मानवीय पक्ष को सामने लाने के लिए तहत मरीजों और सर्वाइवर्स की वास्तविक कहानियां भी साझा की गईं, जिन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्टेम सेल डोनेशन किस तरह जीवन बदल देने वाला प्रभाव डाल सकता है।
इस अवसर पर यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पीएन. अरोड़ा ने कहा कि स्टेम सेल डोनेशन के प्रति जागरूकता फैलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह अभियान चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उपासना अरोड़ा ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से हमारा प्रयास स्टेम सेल डोनेशन की जीवनरक्षक क्षमता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और डोनर रजिस्ट्रेशन को सरल व सुलभ बनाना है।