अमेरिकी कार्रवाई से हिंद महासागर में हलचल, जंग की आशंका तेज
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भारी तनाव अब होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि उन्होंने हिंद महासागर में ईरान से जुड़े एक विशाल तेल टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया है। यह बड़ी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं और उसे नए सैन्य हमलों की चेतावनी दे रहे हैं। इस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में तनातनी और ज्यादा बढ़ गई है।
प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल ले जा रहा था 'स्काईवेव'
जिस जहाज को जब्त किया गया है, उसकी पहचान ‘स्काईवेव’ के रूप में की गई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद यह टैंकर अवैध रूप से ईरानी कच्चे तेल की सप्लाई में लगा हुआ था। इसी वजह से मार्च महीने में इस जहाज पर अमेरिकी प्रतिबंध भी लगाए गए थे। अधिकारियों का दावा है कि ‘स्काईवेव’ ईरान के उस खुफिया जहाजी नेटवर्क (शैडो फ्लीट) का हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर की पाबंदियों से बचकर चोरी-छिपे तेल बेचने के लिए किया जाता है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह जहाज मंगलवार को मलेशिया के पास से गुजरते हुए मलक्का स्ट्रेट को पार कर चुका था। समुद्री विशेषज्ञों के मुताबिक, इस टैंकर में 10 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल भरा हो सकता है, जिसे फरवरी में ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र 'खार्ग द्वीप' से लादा गया था।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
यह कोई पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने समुद्र के बीच में ईरानी तेल जहाजों को निशाना बनाया हो। इससे पहले अप्रैल के महीने में भी अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर से ‘मेजेस्टिक एक्स’ और ‘टिफानी’ नाम के दो अन्य जहाजों को जब्त किया था। उन जहाजों पर भी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर ईरानी तेल ले जाने का आरोप था। दरअसल, अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके तेल कारोबार की कमर तोड़ने की कोशिश में जुटा है। वॉशिंगटन (अमेरिकी सरकार) का मानना है कि तेल बेचकर मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल ईरान अपनी मिसाइल ताकत बढ़ाने और क्षेत्र के अन्य लड़ाकू समूहों को मजबूत करने के लिए करता है।
ट्रंप की सैन्य हमले की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह ईरान पर एक नए सैन्य हमले का आदेश देने से “सिर्फ एक घंटे दूर” थे, लेकिन खाड़ी देशों (मिडल ईस्ट के देशों) की गुजारिश और बीच-बचाव के बाद उन्होंने फिलहाल अपना फैसला टाल दिया। ट्रंप ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम और अपनी क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अमेरिकी शर्तों को नहीं माना, तो आने वाले समय में उसके खिलाफ और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिंद महासागर और अरब सागर में बढ़ते इस विवाद का असर पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है, क्योंकि दुनिया के सबसे प्रमुख तेल मार्ग इसी इलाके से होकर गुजरते हैं।