PM Modi को स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान, राउत बोले कुछ ऐसा…
गोथेनबर्ग (स्वीडन): भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को स्वीडन के बेहद प्रतिष्ठित और सर्वोच्च सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' (डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस) से नवाजा गया है। यह किसी भी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला स्वीडन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। वैश्विक मंच पर पीएम मोदी को मिलने वाला यह 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। जहाँ एक तरफ इस उपलब्धि पर देश-विदेश से बधाइयां मिल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में इस पर राजनीति और बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
18वीं शताब्दी का ऐतिहासिक सम्मान और विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
स्वीडन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' की शुरुआत साल 1748 में हुई थी। यह ऐतिहासिक सम्मान स्वीडन के हितों और आपसी संबंधों को बढ़ावा देने वाले व्यक्तिगत प्रयासों के लिए दिया जाता है। गोथेनबर्ग में आयोजित एक भव्य और विशेष समारोह के दौरान स्वीडन की क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया ने पीएम मोदी को इस पदक से सम्मानित किया। इस मौके पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों की गहरी दोस्ती का प्रतीक है और यह पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा भारत-स्वीडन संबंधों को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान का सम्मान है।
पीएम मोदी ने 140 करोड़ देशवासियों को समर्पित किया पुरस्कार
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर अपनी खुशी साझा की। उन्होंने लिखा, "रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार से सम्मानित होना मेरे लिए गर्व की बात है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों का है। इसके साथ ही यह स्वीडन के उन तमाम दोस्तों का भी सम्मान है जिन्होंने हमारे द्विपक्षीय रिश्तों को एक मजबूत आधार दिया है। मैं कामना करता हूँ कि दोनों देशों की यह अटूट मित्रता भविष्य में और फले-फूले।"
विपक्ष का तंज: "अवॉर्ड पाने में सेंचुरी पूरी कर लेंगे पीएम"
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान के मिलते ही देश के भीतर राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पर तंज कसा। संजय राउत ने कहा, "वह (पीएम मोदी) जिस भी देश में कदम रखते हैं, वहाँ का सबसे बड़ा पुरस्कार उन्हें मिल जाता है। इस रफ्तार से तो वह अवॉर्ड्स का शतक भी पूरा कर लेंगे, लेकिन इस अवॉर्ड का देश के लिए क्या फायदा? वह विपक्ष को विदेश दौरों पर न जाने की नसीहत देते हैं, जबकि खुद लगातार अलग-अलग देशों की यात्राएं कर रहे हैं।"