गांव को बाढ़ से बचाने के लिए एसीपी बनीं प्रियाश्री पाल
गाजियाबाद। शहर की वेव सिटी थाने की एसीपी प्रियाश्री पाल लोगों में काफी फेमस हैं। हाल ही में कड़कड़ाती ठंड में झुग्गियों में रहने वाले परिवारों को कंबल बांटने पर उनकी काफी तारीफ हुई। वह इस नौकरी में एक जज्बे के कारण आईं, जो उनको उनके पिता से मिला। बचपन में अपने जिले को बाढ़ से बेहाल होता देख मन दुखी होने पर उन्होंने कुछ करने के लिए सिविल सर्विस की तैयारी की और चयनित होकर देशसेवा की शपथ ली। उन्हें उनके कामों के लिए ग्लोबल वुमेन अचीवर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
मूल रूप से पश्चिम बंगाल के बीरभूम की रहने वाली प्रियाश्री पाल का जन्म 2 जून 1989 को हुआ। उनके पिता प्रवीर कुमार पाल सेना में सूबेदार मेजर थे, जो अब और रिटायर हो चुके हैं। सेना में सेवा के चलते प्रियाश्री का बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता। प्रियाश्री बताती हैं कि प्रशासनिक सेवा में आने की प्रेरणा उन्हें बचपन से ही मिली। उनके गांव में हर साल आने वाली बाढ़ और उससे जूझते लोगों को देखकर वह अक्सर सवाल करती थीं कि इनके लिए कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं है। एक बार उनके अंकल ने उनसे कहा था, तुम बड़ी होकर इनके लिए कुछ करना। यही बात उनके जीवन का लक्ष्य बन गई।
प्रियाश्री ने बीएससी नर्सिंग की डिग्री के बाद अमेरिका में एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी ज्वाइन की, लेकिन वहां उन्हें बचपन का वो वादा याद आता रहा। बचपन में अपने गांव बीरभूम में हर साल आने वाली बाढ़ और लोगों की बेहाली देख उन्होंने कसम खाई थी कि वह बड़ी होकर व्यवस्था का हिस्सा बनेंगी। अपने इसी वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने भारत लौटकर सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। पहले ही परीक्षा में उन्हें 33वीं रैंक मिली और वह पुलिस सेवा का हिस्सा बन गईं। 15 सितंबर 2021 को उन्होंने पुलिस सेवा ज्वाइन की। उनकी पहली तैनाती वाराणसी में हुई। वर्तमान में वह गाजियाबाद में डीएसपी/एसीपी के पद पर तैनात हैं और कानून व्यवस्था संभाल रही हैं। उनकी चार साल की एक बेटी भी है। वह अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन बनाते हुए वह गाजियाबाद की कानून व्यवस्था को मजबूती से संभाल रही हैं। प्रिया कहती हैं कि वर्दी पहनने का सपना उनके मन में हमेशा से था। जब उनके पिता एक बार उनकी मां और उन्हें दिल्ली की परेड में लाए थे तो यूनिट में भाग लेते देख उन्हें काफी गौरवान्वित महसूस हुआ था। तबसे उनकी इच्छा भी देश के प्रति कुछ करने की थी।
घुड़सवारी में चैंपियन
प्रिया को घुड़सवारी का बेहद शौक है। वह इसमें चैंपियन भी रह चुकी हैं। उनका कहना है कि कोई भी खेल आपको मजबूती देता है और तनाव से दूर रखता है। उन्होंने बच्चों से किसी न किसी खेल में भाग लेने को कहा।