त्विषा शर्मा केस में नया मोड़, CBI जांच के लिए केंद्र से सिफारिश
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में एक बहुत बड़ा मोड़ आया है। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की सिफारिश कर दी है। राज्य के गृह विभाग की ओर से इस संबंध में केंद्र सरकार को सहमति पत्र भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उन्हें निष्पक्ष जांच और पूरी मदद का भरोसा दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।
शादी के महज 5 महीने बाद ससुराल में मिली थी लाश
मूल रूप से नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय त्विषा शर्मा की लाश बीते 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित उनके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकी मिली थी। त्विषा की शादी को अभी सिर्फ 5 महीने ही हुए थे। मौत की खबर मिलते ही त्विषा के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं बल्कि हत्या है, और साक्ष्यों को छुपाने की कोशिश की गई है। वहीं दूसरी तरफ, ससुराल पक्ष का दावा है कि त्विषा मानसिक तनाव में थीं। हालांकि, मायके वालों ने पुलिस की शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे।
पूर्व जज और वकील पति पर दहेज उत्पीड़न का केस
इस मामले में पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह (जो पेशे से वकील हैं) और उनकी सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, प्रताड़ित करने और दहेज मृत्यु से संबंधित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। खास बात यह है कि त्विषा की सास गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला जज (रिटायर्ड जज) हैं। मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपी पति समर्थ सिंह फरार चल रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 30 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की है। कोर्ट ने आरोपी पति की अग्रिम जमानत याचिका को पहले ही खारिज कर दिया था, जबकि सास को कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
मामले की निष्पक्षता के लिए दोनों पक्ष पहुंचे हाई कोर्ट
इस पूरे विवाद के बीच दोनों परिवारों ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया है। त्विषा के परिजन लगातार दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका आरोप है कि पहले पोस्टमार्टम में कई जरूरी तथ्यों को छुपाया गया है। वहीं आरोपी पक्ष के वकीलों का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद हैं। पहले इस मामले की जांच के लिए स्थानीय पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने से पीड़ित परिवार को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय की उम्मीद बंधी है।