महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: तारीखों का ऐलान, राजनीति में हलचल
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य की विधान परिषद (Local Authorities' Constituencies) की रिक्त पड़ी 16 सीटों पर चुनाव कराने की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही संबंधित इलाकों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव को लेकर रणनीतियों और बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, क्योंकि सभी दल इसे अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के बड़े मौके के रूप में देख रहे हैं।
नामांकन से लेकर नतीजों तक: यह रहेगा पूरा चुनावी कार्यक्रम
चुनाव आयोग द्वारा जारी टाइमलाइन के अनुसार, इन 16 सीटों के लिए चुनावी अधिसूचना 25 मई, 2026 (सोमवार) को जारी की जाएगी, जिसके साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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नामांकन की आखिरी तारीख: 1 जून, 2026
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समीक्षा (स्क्रूटनी): 2 जून, 2026
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नाम वापसी की अंतिम तिथि: 4 जून, 2026
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मतदान की तारीख: 18 जून, 2026 (सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक)
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मतगणना (नतीजे): 22 जून, 2026
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चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति: 25 जून, 2026 तक पूरी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।
इन 16 जिलों/क्षेत्रों में सजने जा रहा है चुनावी मैदान
विधान परिषद की जिन 16 सीटों पर मतदान होना है, उनमें महाराष्ट्र के प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में सोलापुर, अहमदनगर, ठाणे, जलगांव, सांगली-सतारा, नांदेड़, यवतमाल, पुणे, भंडारा-गोंदिया, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, नासिक, वर्धा-चंद्रपुर-गडचिरोली, अमरावती, उस्मानाबाद-लातूर-बीड़, परभणी-हिंगोली और औरंगाबाद-जालना शामिल हैं। इसके अलावा, चंद्रशेखर बावनकुले के विधानसभा में चुने जाने के बाद रिक्त हुई नागपुर सीट पर भी इसी शेड्यूल के तहत उपचुनाव कराया जाएगा।
क्यों टल रहे थे चुनाव? आयोग के कड़े नियमों के बाद मिली हरी झंडी
इन सीटों पर पूर्व सदस्यों का कार्यकाल काफी समय पहले खत्म हो चुका था, लेकिन तकनीकी कारणों से चुनाव नहीं हो पा रहे थे। दरअसल, चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव तभी संभव हैं जब वहां कम से कम 75% स्थानीय निकाय (जैसे नगर पालिका, जिला परिषद आदि) सक्रिय हों और 75% मतदाता उपलब्ध हों। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में यह कोरम पूरा नहीं था। अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी से हरी झंडी और सभी मानक पूरे होने की रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग ने चुनाव कराने का फैसला लिया है।
महायुति बनाम महाविकास अघाड़ी: प्रतिष्ठा की लड़ाई और खास समीकरण
चूंकि यह चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि नगर निगमों, जिला परिषदों और नगर परिषदों के चुने हुए प्रतिनिधियों (पार्षदों/सदस्यों) द्वारा वोट डालकर लड़ा जाता है, इसलिए इसे 'लोकल बॉडीज इलेक्शन' भी कहते हैं। राज्य की सत्ताधारी महायुति (भाजपा, शिवसेना-शिंदे, एनसीपी-अजीत पवार) और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, एनसीपी-शरद पवार) के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि स्थानीय स्तर पर जोड़-तोड़, क्रॉस वोटिंग और गुप्त समीकरण इन सीटों के नतीजों को तय करेंगे, जो भविष्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।