अधिकतर सोसायटियों में बिल्डर दबाए हैं आईएफएमएस के पैसे
- एओए का आरोप, ब्याज के कारण लौटाने में लगाते हैं समय, इस राशि का केवल मूलधन लौटाना होता है
गाजियाबाद। शहर की अधिकतर सोसायटियों में एओए और बिल्डर के बीच आईएफएमएस (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) की राशि को लेकर विवाद चल रहा है। एओए को हैंडओवर देने के बाद भी कई जगहों पर आईएफएमएस की राशि को बिल्डर ने हैंडओवर नहीं किया है। एओए का आरोप है कि बिल्डर इस पर मोटा ब्याज लेते हैं, इसलिए या तो इस राशि को देने में आनाकानी करते हैं या लंबा समय लगाते हैं, क्योंकि एओए को केवल मूलधन लौटाना होता है।
राजनगर एक्सटेंशन स्थित अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी को अजनारा इंडिया लिमिटेड कंपनी ने अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन (एओए) को 2017-18 में हैंडओवर किया। उसके बाद से आज तक आईएफएमएस की राशि एसोसिएशन को नहीं सौंपी। एओए अध्यक्ष गौरव कुमार का कहना है कि जीडीए ने कई बार नोटिस भेजा, इसके बाद भी बिल्डर ने राशि वापस नहीं की। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में चला, वहां भी हम जीत गए, पर राशि नहीं मिली। कोर्ट ने जीडीए को अवमानना का नोटिस भेज पैसे दिलाने को कहा, लेकिन पैसे नहीं मिले। इसके बाद फिर जीडीए अधिकारियों संग कई बार बैठक हुई, बिल्डर ने आश्वासन दिया, पर आज तक राशि नहीं मिली। अब हम दोबारा अवमानना का नोटिस जारी कराएंगे। लोगों के खून-पसीने के साढ़े चार करोड़ रुपये बिल्डर के पास फंसे हुए हैं। बिल्डर इस पैसे पर ब्याज खाते हैं और पैसे को अन्य योजनाओं में लगाते हैं, इसलिए वापस नहीं करते।गौर कैस्केड सोसायटी 2019 में एओए को हैंडओवर हुई, लेकिन अभी तक आईएफएमएस की राशि के पौने चार करोड़ रुपये एसोसिएशन को नहीं मिले हैं। एओए सचिव पुनीत गोयल कहते हैं कि इस पैसे को लेकर भ्रष्टाचार का खेल होता है। अधिकारियों और बिल्डरों की इसमें मिलीभगत होती है। लोगों के इस पैसे पर बिल्डर ब्याज लेता रहता है, क्योंकि यह राशि ब्याजमुक्त होती है यानि इसे एसोसिएशन को मूलधन लौटना पड़ता है, इसलिए वह इसे रोककर इसके ब्याज का स्वहित में इस्तेमाल करता है।
गुलमोहर गॉर्डन में सात करोड़ हैं बकाया
राजनगर एक्सटेंशन की ही गुलमोहर गॉर्डन सोसायटी 2019 में हैंंडओवर हुई, लेकिन अभी तक आईएफएमएस के सात करोड़ रुपये बिल्डर (एसवीपी कंपनी) ने नहीं लौटाए। अध्यक्ष अभिषेक पांडेय कहते हैं कि अधिकतर बिल्डर आंशिक हैंडओवर देते हैं, जिसमें मेंटीनेंस और सुरक्षा शामिल होती है, जबकि नियमानुसार एओए बनने के बाद पूर्ण हैंडओवर करना चाहिए। इस राशि के कारण वह पूरा हैंडओवर देने से बचते हैं। इस पर मोटा ब्याज कमाते हैं और मूलधन लौटाते हैं, इसलिए देने में समय लगाते हैं।
केडीपी ग्रैंड सवाना में भी सात करोड़ की राशि है बकाया
केडीपी ग्रैंड सवाना के अध्यक्ष राहुल बालियान कहते हैं कि सात करोड़ रुपये को हमारी मूलधन हैं और ब्याज अलग से। 2016 में एओए को आधा-अधूरा हैंडओवर किया गया। इस राशि के लिए कई बार बैठक हो चुकी, लेकिन अभी तक बिल्डर ने नहीं दी। जल्द ही फिर बैठक होने वाली है। जीडीए में भी इस संबंध में पत्राचार किया जा रहा है।
राजनगर एक्सटेंशन की 80 प्रतिशत सोसायटियों में विवाद
राजनगर एक्सटेंशन में 62 से अधिक सोसायटियां। यहां 80 प्रतिशत में आईएफएमएस की धनराशि को लेकर विवाद है। यह राशि फ्लैट के पजेशन के समय चेक से बिल्डर दूसरे खाते में लेता है। यह ब्याजमुक्त राशि होती है। ब्रॉसर में इस राशि के बारे में पूरा विवरण होता है। बिल्डर इससे मुकर नहीं सकता। प्रोजेक्ट पूरा होने और एओए को हैंडओवर के बाद उसे यह राशि भी हस्तांतरित करनी होती है। ब्याज के कारण बिल्डर इसे देने में आनाकानी करते हैं या काफी समय लगाते हैं।
- अभिनव त्यागी, महासचिव फेडरेशन ऑफ राजनगर एक्सटेंशन सोसायटीज
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बिल्डर को एओए को सभी चीजें हैंडओवर करनी जरूरी हैं और इसके साथ ही आईएफएमएस का पैसा देना भी अनिवार्य होता है। यह फ्लैट मालिकों को या एओए एसोसिएशन दोनों में किसी को भी दिया जा सकता है। यह राशि ब्याजमुक्त होती है। बिल्डर को केवल मूलधन लौटाना होता है। इसमें पूरी पारदर्शिता बरतनी जरूरी है। जिन बिल्डरों ने राशि नहीं लौटाई है, उनके साथ जल्द बैठक की जाएगी।
विपुल गिरी, अध्यक्ष क्रेडाई
शहर में 350 से अधिक सोसायटियां हैं। पिछले 10 से 15 सालों में बनीं अधिकतर सोसायटियों में ब्याजमुक्त गुप्त धन को लेकर विवाद है। बिल्डर इसका मोटा ब्याज खाते हैं, इसलिए वह इस धनराशि को एओए को वापस नहीं करते, जबकि हैंडओवर के समय इसे देना जरूरी है।
- कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी (सेवानिवृत्त), चेयरमैन आरडब्ल्यूए व फ्लैट ऑनर्स फेडरेशन
क्रॉसिंग में 28 बहुमंजिला इमारते हैं। यहां की भी अधिकतर सोसायटियों में इस पैसे को बिल्डर ने नहीं लौटाया है। बहुत कम बिल्डर ही इस राशि को लेकर वफादार हैं। 75 प्रतिशत से अधिक में विवाद ही है।
- रोहित चौधरी, अध्यक्ष क्रॉसिंग रिपब्लिक फ्लैट ऑनर्स एसोसिएशन (क्रोमा) किसने लौटाया पैसा, कहां विवाद
कितनी राशि ली जाती है
यह पैसा फ्लैट के क्षेत्र के अनुसार 15 से 30 वर्ग फीट के हिसाब से लिया जाता है।
कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर यह 30 से 50 रुपये वर्ग फीट के हिसाब से लिया जाता है।
बिल्डर के बयान
राजनगर एक्सटेंशन की गुलमोहर गॉडर्न सोसायटी में अभी हमारे दो टावर का काम चल रहा है। इस कारण आईएफएमएस का पैसा देने में देरी हो गई। इसमें केवल मूलधन वापस करना होता है। हम इस राशि को जल्द लौटाएंगे।
- विजय सिंघल, मैनेजिंग डायरेक्टर, एसवीपी ग्रुप (गुलमोहर गॉडर्न सोसायटी, राजनगर एक्सटेंशन)
हम आईएफएमएस का पैसा लौटा चुके हैं। इसके लिए बकायदा एमओटी साइन होता है, जो हम कर चुके हैं। हमारे पास सभी कागजात हैं। नई-नई एओए आती हैं और नई-नई बात निकालती हैं। हम फेयर काम करते हैं।
-मनोज गौर, चेयरमैन, गौर संस कंपनी (गौर कैस्केड सोसायटी, राजनगर एक्सटेंशन)
इस संबंध में अभी पूरी जानकारी नहीं है। हमारी कंपनी का मेंटीनेंस लोटस कंपनी देखती है। उनसे बात करके पूरी जानकारी लूंगा।
अमित शर्मा, मैनेजर, अजनारा इंडिया लिमिटेड
इस संबंध में अजनारा इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन प्रमोद गुप्ता और केडीपी इंफ्राक्ट्रचर प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन केके गोयल को कई बार फोन किए गए, मैसेज किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अजनारा का मेटीनेंस देख रही लोटस कंपनी के वरिष्ठ मैनेजर दिलीप को कई बार फोन किया गया। उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया।
यूपी अपार्टमेंट एक्ट में ग्राहक और बिल्डर कंपनी के बीच आईएफएमएस के पैसे के लेन-देन का पूरा ब्योरा होता है। यह पैसा बिल्डर को ग्राहक या एओए को लौटाना होता है। इसके बाद भी अगर कोई बिल्डर नहीं लौटाता और शिकायत आती है तो जीडीए उसे निर्देशित करता है। कई बार मामला अदालत में भी चला जाता है।
- रुद्रेश शुक्ला, मीडिया प्रभारी, जीडीए