हिजबुल मुजाहिदीन का सदस्य और नार्को-टेरर आरोपी भारत लाया गया
नई दिल्ली: देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर जारी अभियान में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े और नार्को-टेररिज्म के कुख्यात आरोपी इकबाल सिंह उर्फ शेरा को पुर्तगाल से गिरफ्तार कर भारत लाया गया है। एनआईए ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं और पुर्तगाल सरकार से प्रत्यर्पण संधि के तहत आरोपी को दिल्ली की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से जांच एजेंसी को उसकी दो दिनों की ट्रांजिट रिमांड मिल गई है। अब इस खूंखार तस्कर को पंजाब ले जाकर सुरक्षा एजेंसियां सघन पूछताछ करेंगी, जिससे देश विरोधी कई बड़े षड्यंत्रों का पर्दाफाश होने की पूरी उम्मीद है।
अटारी बॉर्डर पर अब तक की सबसे बड़ी हेरोइन तस्करी का मुख्य सूत्रधार
पकड़ा गया आरोपी इकबाल सिंह उर्फ शेरा अमृतसर के अटारी बॉर्डर पर पकड़ी गई देश की सबसे बड़ी मादक पदार्थों की खेप का मुख्य सरगना माना जा रहा है, जिसमें सुरक्षा बलों ने पांच सौ बत्तीस किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक शेरा सीमा पार पाकिस्तान से संचालित होने वाले ड्रग्स और आतंकवाद के खतरनाक गठजोड़ का भारत में सबसे बड़ा चेहरा था। वह पड़ोसी मुल्क में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर भारतीय सीमाओं के भीतर हेरोइन की बड़ी खेप मंगवाता था और फिर उस नशीले पदार्थ को देश के विभिन्न राज्यों में बेचकर मिलने वाली करोड़ों रुपये की काली कमाई को हवाला नेटवर्क के जरिए जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाता था, ताकि वहां अशांति और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके।
चार वर्षों तक विदेशों में छिपने के बाद इंटरपोल की मदद से प्रत्यर्पण
मूल रूप से पंजाब के अमृतसर का रहने वाला इकबाल सिंह साल दो हजार बीस में अपने खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के तुरंत बाद देश छोड़कर अवैध तरीके से भाग निकला था। भारत से फरार होने के बाद उसने यूरोपीय देश पुर्तगाल में अपना गुप्त ठिकाना बना लिया था, जिसके बाद भारतीय अदालतों ने अक्टूबर दो हजार बीस में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके पश्चात भारत सरकार की पहल पर जून दो हजार किस में उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कराया गया था ताकि वैश्विक स्तर पर उसकी आवाजाही पर रोक लगाई जा सके। आखिरकार भारत सरकार के गृह मंत्रालय और कूटनीतिक प्रयासों के सफल समन्वय के चलते पुर्तगाल सरकार ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दे दी।
पंजाब में गुर्गों का संगठित गैंग और हिजबुल कमांडरों से सीधा संपर्क
एनआईए के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शेरा ने पंजाब के विभिन्न जिलों में युवाओं को गुमराह कर अपना एक बहुत बड़ा संगठित नेटवर्क और गैंग तैयार कर रखा था। यह गिरोह केवल सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों की आपूर्ति ही नहीं करता था बल्कि व्यापारियों से जबरन वसूली और हवाला की रकम को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने का काम भी संभालता था। तफ्तीश में यह बात पूरी तरह साबित हो चुकी है कि शेरा के तार पाकिस्तान में शरण लिए हुए हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष आतंकी कमांडरों से सीधे जुड़े हुए थे और वह उनके इशारे पर भारतीय युवाओं की नसों में ड्रग्स का जहर घोलकर उस पैसे से देश के खिलाफ हथियारों की खरीद-फरोख्त का इंतजाम करता था।
हिलाल शेरगोजरी की गिरफ्तारी से खुला नार्को टेरर फंडिंग का बड़ा राज
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ सबसे पहले पंजाब पुलिस की एक कार्रवाई के दौरान हुआ था, जब उन्होंने हिजबुल मुजाहिदीन के ओवरग्राउंड वर्कर हिलाल अहमद शेरगोजरी को गिरफ्तार किया था। हिलाल के पास से उस वक्त नार्को-टेररिज्म के माध्यम से एकत्र की गई करीब उनतीस लाख रुपये की भारी नकदी बरामद हुई थी, जो मुठभेड़ में मारे जा चुके कुख्यात आतंकी कमांडर रियाज अहमद नायकों तक पहुंचाई जानी थी। इसके बाद जब पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में फैले इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों पर दबिश दी गई तो कुल मिलाकर करीब बत्तीस लाख रुपये की टेरर फंडिंग की राशि जब्त की गई थी, जिसके बाद मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को देखते हुए यह पूरा संवेदनशील केस एनआईए को सौंप दिया गया था।