कोर्ट में गरमागरम बहस, पूर्व सीएम ने रखी अपनी बात
दिल्ली। मेरे पूरे करियर में पहली बार किसी ने मुझे रिक्यूज करने के लिए कहा है, उम्मीद है अच्छा फैसला दूंगी। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति की एकल पीठ कथित आबकारी घोटाले से जुड़े मामले में रिक्यूजल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति ने कहा कि रिक्यूजल न्यायिक क्षेत्राधिकार पर आज बहुत कुछ सीखा। सोमवार चार घंटे से अधिक समय तक हुई लंबी सुनवाई में दोनों पक्षों ने तीखी बहस की, जिसमें केजरीवाल ने खुद कोर्ट में पेश होकर दलीलें रखीं।
सुनवाई की शुरुआत से ही माहौल गर्म रहा। केजरीवाल ने खुद को पार्टी-इन-पर्सन बताते हुए याचिका पर बहस की। उन्होंने न्यायाधीश पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि न्यायमूर्ति शर्मा की पिछली टिप्पणियां, आदेश और अदालत के बाहर की गतिविधियां उनके मन में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर गंभीर आशंका पैदा करती हैं। केजरीवाल ने दावा किया कि जो कुछ भी सीबीआई और ईडी कहती है, वह न्यायमूर्ति शर्मा स्वीकार कर लेती हैं। उन्होंने 10 कारणों का हवाला देते हुए रिक्यूसल की मांग की, जिसमें न्यायाधीश की ओर से आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) के कार्यक्रम में चार बार भाग लेना शामिल था।
केजरीवाल बोले मेरे मन में आशंका कि बेंच मुझे निष्पक्ष नहीं सुनेगी
केजरीवाल ने कोर्ट में कहा, न्याय न केवल किया जाना चाहिए, बल्कि ऐसा प्रतीत भी होना चाहिए कि न्याय हो रहा है। मेरे मन में आशंका है कि इस बेंच के सामने मामला निष्पक्ष रूप से नहीं सुना जाएगा। उन्होंने न्यायाधीश की उपस्थिति को आरएसएस-बीजेपी से विचारधारा संबंधी जुड़ाव से जोड़ते हुए तर्क दिया कि इससे निष्पक्षता पर सवाल उठता है। केजरीवाल ने कहा कि न्यायाधीश ने सीबीआई ईडी के तर्कों को बिना गहराई से जांचे स्वीकार किया, जबकि आरोपी पक्ष की दलीलों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने मार्च के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक्स-पार्टे (एक पक्षीय) था और इसमें अंतरिम राहत दी गई, जो उनके पक्ष को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने कहा मामले में 40 हजार से ज्यादा पन्ने के चार्जशीट को बिना देखे सीधे फैसला सुनाया गया। जबकि इस दौरान कोई भी प्रतिवादी नहीं मौजूद था।
वकील नहीं खुद ही पक्ष रखने पर जोर
केजरीवाल ने आगे कहा कि वे खुद बहस करेंगे क्योंकि उन्होंने किसी वकील को वकालतनामा नहीं दिया है। उन्होंने हाईकोर्ट की प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा, मैंने रिक्यूसल एप्लीकेशन फाइल की है, कृपया इसे रिकॉर्ड पर लें। पिटीशनर-इन-पर्सन होने के कारण ई-फाइलिंग नहीं हो सकी, इसलिए हार्ड कॉपी स्वीकार की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं और इस याचिका पर खुद बहस करेंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल और सिसोदिया की याचिका का विरोध किया। एसजी ने कहा कि न्यायाधीश की पिछली टिप्पणियां कानून की मांग के अनुसार थीं और बिना इनके आदेश कमजोर हो सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये अस्थायी टिप्पणियां आदेश पारित करने के लिए जरूरी होती हैं।
सीबीआई ने किया केजरीवाल के तर्कों का विरोध
सेवा संबंधी आपत्ति पर एसजी ने कहा कि वकीलों के माध्यम से नोटिस सर्व किया जाना पूरी तरह वैध है। कोर्ट के रजिस्ट्रार में दर्ज है कि उनके वकीलों को सर्विस हुई थी। उसी दिन उन्होंने रिक्यूसल याचिका दायर कर दी, जो दर्शाता है कि उन्हें जानकारी थी। अधिवक्ता परिषद कार्यक्रम में न्यायाधीश की भागीदारी पर एसजी ने इसे बचकाना तर्क बताया। उन्होंने कहा, अधिवक्ता परिषद एक बार एसोसिएशन है। अगर कोई न्यायाधीश बार एसोसिएशन की ओर से कानून के विषय पर आमंत्रित किया जाता है, तो क्या उन्हें मना कर देना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक कई न्यायाधीश इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। यहां तक कि एक न्यायाधीश जिसने उन्हें जमानत दी थी, वह भी शामिल थे।
केजरीवाल के साथ अन्य आरोपियों ने भी रखी दलीलें
केजरीवाल के अलावा विजय नायर, और अन्य आरोपियों ने भी अपनी दलीले सामने रखी। प्रतिवादियों ने अदालत के समय को लेकर ध्यान दिलाया गया लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि वह आज ही इस मामले सभी दलीलें सुनेंगी जिसके बाद उन्होंने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
दुर्लभ है रिक्यूजल याचिकाएं
रिक्यूसल याचिकाएं न्यायपालिका में दुर्लभ होती हैं और इन्हें केवल तभी स्वीकार किया जाता है जब ठोस सबूत हों कि न्यायाधीश निष्पक्ष नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में कहा गया है कि रिक्यूसल का आधार रियल डाउट या रिजनेबल अप्रीहेनशन होना चाहिए, न कि मात्र शंका। एसजी ने भी यही तर्क दिया कि केजरीवाल के आरोप निराधार हैं और ये याचिका न्याय प्रक्रिया को लंबा खींचने की कोशिश है।
आपने अच्छी जिरह की, बन सकते हैं अधिवक्ता
मामले में जिरह पूरी करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से अदालत कक्ष से बाहर जाने की अनुमति मांगी। इस पर पीठ ने केजरीवाल से कहा कि आपने अच्छी जिरह की और आप वकील भी बन सकते हैं। इस पर केजरीवाल ने कहा कि वह वर्तमान में जो कर रहे हैं उससे खुश हैं। उन्होंने अदालत का धन्यवाद किया और कोर्ट रूम से बाहर चले गए। इस दौरान दूसरे प्रतिवादी की तरफ से जिरह के लिए खड़े हुए वकील ने मजाकिया अंदाज में अदालत से कहा कि वह कंपटीशन ना बढ़ाएं।
अदालत और न्यायमूर्ति का है सम्मान : केजरीवाल
केजरीवाल ने अपनी दलील की शुरुआत अदालत और न्यायमूर्ति के सम्मान करने की बात से की। इस पर अदालत ने कहा कि सम्मान पूरी तरह से पारस्परिक है। आप अपनी बात शुरू करें। इस पर केजरीवाल ने मामले को शुरुआत से बोलना शुरू किया जिस पर पीठ ने कहा कि आप रिक्यूजल याचिका पर बात रखें जिस पर केजरीवाल ने कहा कि मैडम मेरी बात दो मिनट सुन लीजिए। इसके बाद बेंच ने केजरीवाल को करीब 45 मिनट तक हिंदी में बात रखने का अनुमति दी।