नगर निगम के स्कूलों में छात्राओं के पास नहीं हैं किताबें
गाजियाबाद। नगर निगम बालिका विद्यालय के स्कूलों में छठी से आठवीं तक की छात्राओं को अभी तक किताबें नहीं मिली हैं। जिस कारण जहां छात्राओं को बिना पुस्तकों के पढ़ाई करनी पड़ रही है, वहीं स्कूलों में शिक्षक दीक्षा एप के माध्यम से पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षकों ने भी इस संबंध में कई बार निगम अधिकारियों और बेसिक शिक्षा विभाग को सूचित किया, लेकिन आधा सेशन बीत जाने के बाद भी बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी हैं।
इस संबंध में कई बार अभिभावकों ने पेरेंट्स टीचर मीटिंग में इसकी शिकायत शिक्षकों से की, लेकिन किताबें नहीं मिलीं और आधा सत्र निकल गया। छात्रा शबनम ने बताया कि किताबें न होने से घर पर पढ़ाई नहीं हो पाती है। घर पर केवल मैडम वाला रिवीजन ही हो पाता है। शिक्षिकाएं भी दीक्षा एप से पढ़ाती हैं। एक शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बारे में कई बार निगम अधिकारियों और बेसिक शिक्षा विभाग में भी कई बार संपर्क किया गया, लेकिन किताबें नहीं मिलीं। छठी से आठवीं तक बच्चों की सरकारी किताबें बाजार में तो मिलती नहीं हैं। यह सरकार की तरफ से सर्व शिक्षा अभियान के तहत मुफ्त मिलती हैं। फिर इन स्कूलों में बेहद गरीब तबके के बच्चे हैं जो एक पेंसिल तक नहीं खरीद सकते तो किताब कहां से लाएंगे। कुछ के पास पुरानी किताबों से प्रबंध किया गया है, लेकिन सबके पास नहीं हैं। शिक्षक भी बिना पुस्तकों के पढ़ाते हैं। इस संबंध में निगम अधिकारियों को खुद सोचना चाहिए और बेसिक शिक्षा विभाग ने टाईअप करके किताबों का प्रबंध करना चाहिए। हम सब दीक्षा एप से पढ़ा रहे हैं।
इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव का कहना है कि किताबों की मांग आती है तो जरूर जाती हैं। हमारा काम हर स्कूल में मुफ्त में किताबें उपलब्ध कराना है। हर किताब का डाटा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड होता है। हमारे पास इन स्कूलों से संबंधित कोई मांग नहीं आई। इस संंबंध में अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव का कहना है कि शहर में नगर निगम के सात विद्यालय हैं। जिसमें से चंद्रपुरी एमबी गर्ल्स ऐडिड है, बाकी छह निगम की ओर से वित्तपोषित हैं। सभी विद्यालय बालिकाओं के हैं। इन स्कूलों में क्या मुफ्त किताबों का प्रावधान है, प्रधानाचार्य और बेसिक शिक्षा विभाग से इसकी जानकारी लेकर किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी।