अनदेखी : हम-तुम रोड के लिए 17 सालों में किसानों की जमीन का कब्जा नहीं ले सका जीडीए
- 150 किसानों में से अभी तक केवल सात ने दी है सहमति
- मुआवजा राशि को लेकर फंसा पेंच
गाजियाबाद। हम-तुम रोड के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण 17 सालों में भी किसानों की जमीन नहीं ले पाया। 150 किसानों में से अभी तक केवल 9 ने सहमति जताई है। मुआवजे की रकम को लेकर अभी तक मामला अटका हुआ है। जीडीए ने हाल ही में आनन-फानन में एक साल से रुका टेंडर 24 मीटर सड़क के लिए खोल तो दिया पर हकीकत में इतनी चौड़ी सड़क बनाने में अभी कई पेंच हैं। इसे आप निवासियों के साथ धोखा मान सकते हैं।
हम-तुम रोड पर 2009 से प्रोजेक्ट शुरू हुए। 2013 में यहां मीडोज विस्ता सोसायटी में शिफ्ट होने वाले अनूप वालिया कहते हैं कि जब वह सोसायटी का फेस-1 बना तो वह यहां रहने आए, जबसे लेकर आज तक सड़क के लिए जूझ रहे हैं। शुरुआत में यह कच्ची सड़क थी। नए प्रोजेक्ट आने लगे तो बिल्डर ने यह सड़क बनवाई। 2017-18 में इसे आरसीसी रोड बनाया गया। इसके बाद एक के बाद एक प्रोजेक्ट आते गए। नाले के पानी की निकासी रुक गई और सड़क की हालत खस्ता होती गई। आज इस रोड पर सात सोसायटियों में करीब 20 हजार लोग रहते हैं। दो नई सोसायटियां सहित यहां औद्योगिक प्लांट कट रहे हैं। आरसीसी प्लांट सहित कई गोदाम बन गए हैं। प्रतिदिन इस रोड पर पांच हजार से अधिक लोगों का आना-जाना होता है, लेकिन हालत सुधरने का कोई नाम नहीं है। इस पर सोसायटियों के साथ मोरटा गांव, शाहपुर गांव बसे हैं। इसके साथ ही जीडीए का हरनंदीपुरम प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। जिससे यहां दर्जनों डंपर और हाइड़ा चलते हैं, जो इस छह मीटर की सड़क पर लोगों की जान लील रहे हैं।
छह मीटर सड़क का काम रोका
फिलहाल यह रोड छह मीटर की है, जिसे बनाने हाल ही में जीडीए की टीम गई थी, लेकिन इसे किसानों और निवासियों ने दो मांगों के कारण रोक दिया। एक तो पहले नाले के पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए, क्योंकि इसका पानी सड़क पर आने से वह टूटती रहती है। दूसरी सड़क को छह नहीं 24 मीटर ही बनाया जाए। लोगों का कहना है कि अगर अभी छह मीटर सड़क बन गई तो 24 मीटर बनने में इसे सालों लग जाएंगे।
आसान नहीं 24 मीटर की राह
अगर हम बात करें सड़क के चौड़ीकरण की तो अभी यह दूर के ढोल हैं। इसके कई कारण हैं। इस 2.67 किमी लंबी सड़क के लिए 13 एकड़ जमीन चाहिए। जो मोरटा, शाहपुर, भोवापुर के करीब 150 किसानों से ली जानी है। अधिकारी लगातार कह रहे हैं कि सबकी सहमति मिल गई है लेकिन हकीकत में अभी तक केवल 9 किसानों ने सहमति दी है। मुआवजा दर को लेकर अभी मामला अटका पड़ा है। मोरट गांव को जाने वाले रास्ते पर नाले का पानी जमा है। उसकी निकासी नहीं है। यहां सीवर लाइन नहीं है। इस सड़क पर कई बिजली के पोल हैं, जिसे हटाए बिना इसका चौड़ीकरण संभव नहीं। कई सोसायटियों के गेट इस सीमा में आ रहे हैं, जिन्हें भी तोड़ा जाना है। सबसे बड़ी बात संचार रेजीडेंसी के आगे किसानों की जमीन से मिट्टी निकालकर बेची गई है। जिसके कारण उन खेतों में वर्तमान से 10 से 11 फीट का गड्डा है, जिसे भरने के बाद ही सड़क को 24 मीटर का किया जा सकता है। ऐसे में 24 मीटर सड़क बनाने के लिए यह सभी बाधाएं दूर करनी होगी, तभी यह सड़क बन सकेगी, फिलहाल निवासियों को छह मीटर की सड़क बनाने से ही फौरी राहत मिल सकती है, हालांकि अब इसका बनना भी संभव नहीं है क्योंकि सीवर लाइन नहीं होने से सोसायटियों का सारा वेस्ट पानी मोरटा गांव के किसानों के खेत में जा रहा है। जिससे वह बिना नाले के निर्माण के छह क्या चार मीटर सड़क भी नहीं बनने देंगे। ऐसे में अभी निवासियों को गड्ढे से होकर ही सड़क से गुजरना होगा।