पर्यावरण : विजयनगर और मोदीनगर में 24 हेक्टेयर में लगाया जाएगा जंगल
गाजियाबाद। विजयनगर और मोदीनगर में कुल करीब 24 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल लगाया जाएगा। विजयनगर में रक्षा मंत्रालय की कब्जामुक्त कराई गई जमीन के 21 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सघन वन क्षेत्र लगाया जाएगा। इसमें मियावाकी पद्धति के अलावा साधारण तरीके से भी वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। यहां दो लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। मोदीनगर में 2.8 हेक्टेयर में 43 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इस प्रकार दोनों जगह करीब ढाई लाख पौधे लगाए जाएंगे। जिलेभर में इस बार नौ लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे, जबकि प्रदेश में इस मानसून में कुल 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है।
इस संबंध में उप प्रभागीय वन अधिकारी डॉ. सलोनी ने बताया कि एक से सात जुलाई तक वन महोत्सव में मनाया जा रहा है। जिसमें जगह-जगह पौधरोपण किया जाएगा। इस बार जिले को नौ लाख 24 हजार 980 पौधे लगाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसमें वन विभाग का लक्ष्य एक लाख पौधे लगाने का है। इसके अलावा एनसीआर में आने वाले जिलों को एक लाख अन्य पौधे लगाने पड़ते हैं। इस प्रकार इस बार हमारा कुल लक्ष्य 29 स्थानों पर 200975 पौधे लगाने का है। इस बार सबसे अधिक पौधे विजयनगर क्षेत्र में लगाए जाएंगे। यहां रक्षा मंत्रालय की जमीन पर कुल छह साइट पर पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए हमें 21 हेक्टेयर जमीन दी गई है। जिसमें सघन वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसमें एक साइट पर मियावाकी पद्धति से जंगल और अन्य पांच साइट पर घने जंगल लगाए जाएंगे।
इसके अलावा बिसोखर (मोदीनगर) में चार साइट पर जंगल लगाया जाएगा। इसमें आधे-आधे हेक्टेयर में दो जगह मियावाकी पद्धति से दो जगह पर 4 हेक्टेयर में सघन वन लगाया जाएगा। यहां 43 हजार पौधे लगाए जाएंगे। आठ लाख 24 हजार 980 पौधरोपण का लक्ष्य अन्य विभागों को पूरा करना है।
क्या हैं नियम
1-साधारण पौधरोपण में एक हेक्टेयर में 10 हजार पौधे लगाए जाते हैं।
2-मियावाकी पद्धति में छोटे और बड़े दोनों प्रकार के पौधे लगाए जाते हैं। इसमें आधे हेक्टेयर में साढ़े 17 हजार पौधे लगाए जाते हैं।
3-फलदार और ऑक्सीजन देने वाले बड़े पौधों के लिए 0.45x0.45 मीटर का गड्ढा खोदकर पौधा लगाया जाना चाहिए।
जुलाई में मुफ्त में ले सकते हैं पौधा
डॉ. सलोनी ने बताया कि हाल ही में जारी सरकारी आदेश के अनुसार अगर कोई पौधा लेना चाहें तो 31 जुलाई तक विभाग से या अपने नोडल अधिकारियों से मुफ्त में ले सकता है। जिले के 29 विभागों को पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। अपने आसपास के कार्यालय से भी लोग पौधे ले सकते हैं। इसमें पीपल, नीम, जामुन, आम, अमरुद, शीशम, सागौन, सहजन, बरगद, कंजी, पिलखन आदि के पौधे शामिल हैं।
वन विभाग सात जुलाई तक नवजातों के माता-पिता को कीमत और औषधिपूर्ण पौधा देकर करेगा सम्मानित
सरकार की योजनानुसार एक से सात जुलाई वन महोत्सव के दौरान नवजात बच्चों के नाम से उनके माता-पिता को कीमती और औषधीय गुणों से भरपूर पौधे दिए जाने हैं। जिसके तहत पहले दिन मंगलवार को सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर जन्मे 33 नवजातों के माता-पिता को सहजन, शीशम और सागौन के पौधे वितरित किए गए। इसके साथ ही बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट भी दिया गया।
इस संबंध में उप प्रभागीय वन अधिकारी डॉ. सलोनी ने बताया कि अभिभावकों को सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर अधिकतर को सहजन का पौधा दिया गया। इस अवसर पर अभिभावकों को जागरूक भी किया गया। उन्हें पौधा देने के साथ पंपलेट भी दिया गया। साथ ही उन्हें बताया गया कि पौधा लगाना ही नहीं उसे बच्चे के तरह पालने की भी जरूरत है। अगर अधिक से अधिक पौधरोपण किया गया तो पर्यावरण को बचाया जा सकता है। शिशुओं के माता-पिता को इमारती प्रजाति यथा सहजन, सागौन, शीशम आदि के पौधे दिए गए। सहजन के पौधे की पत्तियां, फूल, फली, छाल, बीज में सभी प्रचुर मात्रा में औषधि गुण होते हैं, अभिभावकों को इसके बारे में भी बताया गया। उन्होंने बताया कि सरकार की योजनानुसार शीशम और सागौन के पौधे 12 से 15 साल में तैयार हो जाते हैं और इसके दाम भी अच्छे मिलते हैं। ऐसे में यह बच्चों के भविष्य के लिए भी मूल्यवान उपहार है। साथ ही पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं। सात जुृलाई तक जन्म बच्चों को पौधे दिए जाएंगे।