'ड्रोन दीदी' को मिला केवल प्रशिक्षण, आज तक नहीं मिले ड्रोन, योजना बनी दिखावा
- ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई गई योजना बनी दिखावा
- जिले की केवल पांच महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण, एक साल से बैठीं घर
गाजियाबाद। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना दिखावा बनकर रह गई है। जिले की पांच महिलाओं ने प्रशिक्षण तो लिया लेकिन आज तक न तो उन्हें ड्रोन मिले और न ही अन्य को प्रशिक्षण देने संबंधी कोई दिशानिर्देश मिले। इससे ड्रोन दीदी मायूस हैं।
2025-26 में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों की 266 महिलाओं को ड्रोन दीदी योजना के तहत 15 दिन का प्रशिक्षण जनवरी में दिया गया। इसमें जिले की पांच महिलाएं भी शामिल हुईं। इसके लिए जिले के प्रत्येक ब्लॉक से 20-20 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाना था, लेकिन पूरे जिले से केवल मुरादनगर की पांच महिलाओं ने आवेदन किया। राज्य आजीविका मिशन की ओर इन्हें लखनऊ प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। जनवरी में प्रशिक्षण के बाद से आज तक न तो इन्हें ड्रोन मिले और न ही इस संबंध में कोई निर्देश मिले। तब से यह घर बैठकर चूल्हा-चौका संभाल रही हैं। प्रशिक्षण लेने वाली हर्षलता त्यागी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि यह कुशल ड्रोन दीदी गांव में अन्य महिलाओं को ट्रेनिंग देंगी। उन्हें ड्रोन दिए जाएंगे, जिससे वह खेतों में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करेंगी, ताकि किसानों को राहत मिले और वह कीटनाशक से होने वाली बीमारी से बच सकें। इसके लिए उन्हें पांच बीघे में छिड़काव पर दो हजार रुपये मिलेंगे। ड्रोन का 10 साल बाद नवीनीकरण कराना होगा, लेकिन प्रशिक्षण लिए 14 महीने हो चुके हैं, अभी तक कोई ड्रोन नहीं मिला। हमने अधिकारियों सहित जुलाई में लखनऊ में आयोजित एक सम्मान कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री से भी सवाल पूछा तो उन्होंने जल्द उपकरण दिलाने की बात कही, लेकिन उस बात को भी आठ महीने बीत गए। ड्रोन दीदी आंचल का कहना है कि प्रशिक्षण के बाद हमें कुछ नहीं बताया गया। अगर ड्रोन नहीं मिला तो हम प्रशिक्षण की बातें भी भूल जाएंगे। आस में खाली बैठे हैं कि ड्रोन कब मिलेंगे। इसके बाद आए प्रशिक्षण में कोई नहीं गया।
ड्रोन सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन प्रशिक्षण के बाद कोई दिशानिर्देश नहीं आए। ड्रोन कब मिलेंगे, इसकी कोई जानकारी नहीं है। हमारे सहायता समूह की महिलाएं सहकारिता विभाग की ओर से प्रशिक्षण पर भेजी गई थीं।
स्मिता शिवहरे, जिला मिशन प्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
अभी तक पांच ने प्रशिक्षण लिया है। हम आईसीसीएमआरटी के तहत प्रशिक्षण कराते हैं। प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन छूट पर खरीदने के ऑफर थे, सरकार की ओर से मिलने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
सहायक आयुक्त एवं सहायक प्रबंधक इंदु सिंह, सहकारिता विभाग
क्या है योजना
ड्रोन दीदी योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ड्रोन तकनीक प्रदान कर सशक्त बनाना है। इसके तहत महिलाओं को नैनो उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वह इसे किसानों को किराए पर देकर आय अर्जित कर सकें। यह ड्रोन प्रत्येक गांव पंचायत में सरकार की ओर से एक महिला को दिए जाने थे, जो ब्लॉक पर रखे जाते। ड्रोन दीदी के जरिए किसान इन्हें किराए पर लेकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, कृषि में तकनीक का उपयोग बढ़ाना और लखपति दीदी बनाना है। 2025-26 तक 15,000 महिला को ड्रोन उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन वित्तीय वर्ष खत्म हो चुका है, अभी तक किसी को नहीं मिल सके हैं। जिन महिलाओं को अपना व्यापार या काम शुरू करना हो, उन्हें ड्रोन खरीदने पर 80 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी। ड्रोन की कीमत पांच से 10 लाख तक है।
जिले की ड्रोन दीदी
गांव भदोली - हर्षलता त्यागी
गांव हुसैनपुर- आंचल
जलालपुर ढिंडार- अनीता
आसिफपुर- शंकुतला
पुठरी- प्रमिला
