बोर्ड सदस्यों ने एओए सचिव पर लगाया परेशान करना का आरोप
- गौर कैस्केड सोसायटी का मामला, डीएम और डिप्टी रजिस्ट्रार को लिखा पत्र
- अप्रैल में होने हैं चुनाव, मार्च में होगी जीबीएम
गाजियाबाद।
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैस्केड सोसायटी में बोर्ड सदस्यों ने सचिव पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार और जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। इस संबंध में डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
शिकायतकर्ता अनुज राठी के अनुसार एओए सचिव पुनीत गोयल ने सोसायटी में अपना मकान बेच दिया और मकान बेचने के कुछ दिनों बाद सोसायटी में दूसरा मकान ले लिया। नियमानुसार आप जिस मकान से चुनाव लड़ते हैं, उसी के आधार पर आप बोर्ड सदस्य नियुक्त होते है लेकिन अगर आपने मकान बदल दिया है तो आपको दोबरा नई अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की सदस्यता लेनी पड़ेगी। ऐसे में आपका पद भी खत्म हो जाएगा लेकिन पुनीत गोयल अवैध तरीके से अपने पद पर बने हुए हैं और पद का लगातार दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने मेरे सहित चार बोर्ड सदस्यों संजीव कुमार मलिक, इति सिंघल और निधि शर्मा की सहमति के बिना, एक सदस्य नरेंद्र कुमार को पहले बोर्ड सदस्य नियुक्त किया व फिर उन्हें अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन के चुनाव में भाग लिए बिना अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इसका विरोध निवासियों द्वारा जनरल बॉडी मीटिंग में भी किया जा चुका है। अब बोर्ड मीटिंग नियमों के विरुद्ध बुलाकर बिना प्रॉपर अप्रूवल के अनैतिक कार्य किए जा रहे हैं। बोर्ड मीटिंग में हम चारों बोर्ड सदस्यों के साइन नहीं कराए जाते और हमें एओए ऑफिस में प्रवेश भी नहीं करने दिया जाता है। हमने इसकी शिकायत जिलाधिकारी और डिप्टी रजिस्ट्रार से की है। जिन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार का कहना है कि नियमानुसार फ्लैट बेचने पर नई सदस्यता लेने का प्रावधान है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अप्रैल में होने हैं चुनाव, राजनीतिक फायदे के लिए उठाया जा रहा मुद्दा
सचिव पुनीत गोयल का कहना है कि जब उसी सोसायटी में मकान लिया है तो नई सदस्यता का क्या मतलब है। ऐसा कोई नियम है तो दिखाएं। मेरे पास दोनों मकानों की सदस्यता है। सदस्यता के लिए सोसायटी में मकान होना जरूरी है, यही नियम है। परेशान करने का आरोप बेबुनियाद है। अब अप्रैल में चुनाव होने तय हैं। राजनीतिक रंग देने के लिए यह मुद्दा लाया जा रहा है। चुनाव के समय यह बात क्यों याद आ रही है, जबकि चुनाव हुए 10 महीने से अधिक का समय हो चुका है।