बच्चों में एनीमिया का खतरा! शरीर में दिखें ये 4 बदलाव तो तुरंत कराएं जांच
क्या आपका बच्चा भी थोड़े से काम में थकान महसूस करने लगता है, सीढ़ियां चढ़ते ही उसकी सांस फूलने लगती है या उसका चेहरा पीला नजर आने लगा है? इसे केवल पढ़ाई का बोझ या अधिक परिश्रम मानकर अनदेखा करना सही नहीं है। यह शरीर में किसी गंभीर समस्या या एनीमिया का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।
एनीमिया का अर्थ है शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर का कम होना। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला वह मुख्य प्रोटीन है, जो शरीर के समस्त अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। इसकी कमी से शरीर के अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।
महिलाओं और किशोरियों में अधिक जोखिम
यह समस्या विशेष रूप से महिलाओं और किशोरियों में अधिक देखी जाती है। किशोरावस्था में मासिक धर्म के कारण आयरन की आवश्यकता बढ़ जाती है। आहार में पोषक तत्वों की कमी, शरीर द्वारा आयरन का ठीक से अवशोषण न हो पाना, संक्रमण या निरंतर रक्तस्राव इसके मुख्य कारक हो सकते हैं। छोटे बच्चे भी इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना आवश्यक है।
शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण शरीर में कमजोरी और सुस्ती बनी रहती है। लंबे समय तक रहने वाली आयरन की कमी बच्चों और किशोरों के शारीरिक तथा मानसिक विकास को भी बाधित कर सकती है। इसलिए बच्चों और किशोरियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
त्वचा और आंखों पर दिखने वाले लक्षण
एनीमिया की स्थिति में त्वचा और आंखों का अंदरूनी भाग सामान्य से अधिक पीला दिखाई देने लगता है। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं:
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निरंतर कमजोरी, चक्कर आना और सिरदर्द रहना।
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हाथ-पैरों का ठंडा पड़ जाना और सामान्य कार्य करने पर सांस फूलना।
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हर समय सुस्ती और अत्यधिक नींद का अहसास होना।
केवल रंग देखकर एनीमिया का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि यह पीलिया का लक्षण भी हो सकता है। अतः लक्षण बने रहने पर रक्त की जांच कराना अनिवार्य है।
ऊर्जा के स्तर में गिरावट और थकान
हीमोग्लोबिन घटने से रक्त की ऑक्सीजन परिवहन क्षमता कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित बच्चों को थोड़ा सा काम करने पर ही अत्यधिक थकान महसूस होने लगती है। उनके लिए खेलना, सीढ़ियां चढ़ना या अधिक समय तक खड़े रहना भी कठिन हो जाता है। यदि बच्चा दैनिक गतिविधियों में पहले की तुलना में जल्दी थकने लगे, तो चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।
पढ़ाई और एकाग्रता पर असर
आयरन की कमी से बच्चों की सोचने, समझने, याद रखने और एकाग्र होने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। यदि बच्चे में थकान के साथ-साथ पढ़ाई में मन न लगने, सुस्ती या सीखने की क्षमता में कमी के संकेत दिखें, तो हीमोग्लोबिन की जांच अवश्य कराएं। यद्यपि ये समस्याएं तनाव या नींद की कमी से भी हो सकती हैं, किंतु शारीरिक कमजोरी के साथ पढ़ाई प्रभावित होने पर एनीमिया के जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।