कोनी-मोपका बाईपास की समय-सीमा पर हाईकोर्ट की नाराजगी, एनएचएआई से जवाब तलब
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बिलासपुर शहर में यातायात की गंभीर समस्या को हल करने के लिए प्रस्तावित कोनी-मोपका बाईपास सड़क के निर्माण की समय-सीमा तय न किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम मोहपात्रा और न्यायाधीश संजय कुमार जायसवाल की खंडपीठ ने प्रदेश की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से स्पष्ट जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्तूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की गई है।
एनएचएआई और समय-सीमा पर अदालत की सख्ती
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि 31 अगस्त के पत्र के बावजूद एनएचएआई द्वारा बनाए जाने वाले कोनी-मोपका बाईपास प्रोजेक्ट को पूरा करने की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए खंडपीठ ने एनएचएआई के अधिवक्ता को आवश्यक निर्देश प्राप्त कर अदालत में पेश होने का आदेश दिया। अदालत ने पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन न होने पर भी असंतोष जताया है।
बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की दुर्दशा पर संज्ञान
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने 9 सितंबर को प्रकाशित एक समाचार का हवाला देते हुए बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की बेहद जर्जर हालत की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित किया। सड़क की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उच्च न्यायालय ने एनएचएआई को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
शासन द्वारा सौंपी गई प्रमुख सड़क परियोजनाओं की रिपोर्ट
राज्य शासन की ओर से लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव ने अदालत में शपथ पत्र प्रस्तुत कर बिलासपुर और उसके आसपास की चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का ब्योरा दिया:
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पेंड्रीडीह चौक से नेहरू चौक सड़क: 15.315 किलोमीटर लंबी।
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सीपत से बलौदा, कोरबा सड़क: 14.40 किलोमीटर लंबी।
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श्रीकांत वर्मा चौक से सीएमडी चौक लिंक सड़क: 2.50 किलोमीटर लंबी।
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भाटापारा-सिमरिया-चंदखुरी सड़क: 13.15 किलोमीटर लंबी।