जमशेदपुर।जब किसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें रुकेगी ही नहीं और टिकट काउंटर पर ताला जड़ा रहेगा, तो रेलवे वहां खाली पटरियों और वीरान प्लेटफॉर्मों का क्या सर्वे करेगा? चक्रधरपुर रेल मंडल का एक हालिया फरमान गोविंदपुर के स्थानीय निवासियों के बीच गहरी नाराजगी का कारण बन गया है। गोविंदपुर हाल्ट पर सुबह और शाम के समय चलने वाली प्रमुख मेमू तथा पैसेंजर ट्रेनों (टाटा-खड़गपुर 58028, 68016 और खड़गपुर-टाटा 68011, 68015) का ठहराव लंबे समय से बंद है।

यह मुद्दा जब झारखंड विधानसभा में उठा और जनआक्रोश बढ़ा, तो रेल प्रशासन ने यह तर्क दिया कि पिछले तीन वर्षों के टिकट बिक्री आंकड़ों और जमीनी सर्वे के बाद ही ट्रेनों के पुनः ठहराव पर कोई फैसला लिया जाएगा।

कारणों में लगातार बदलाव: सुरक्षा से लेकर कम यात्रियों का रेलवे का तर्क

रेल प्रशासन द्वारा ठहराव बंद करने के कारणों में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। प्रारंभ में सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया, जिसके बाद सुरक्षात्मक चुनौतियों की बात कही गई और अब कम यात्री संख्या का तर्क दिया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब ट्रेनें रुकना ही बंद हो गई हैं और टिकट बिक्री व्यवस्था ठप है, तो यात्री आंकड़े दर्ज होना संभव ही नहीं है। बिना ट्रेन रुके टिकटों की बिक्री का आकलन करने की प्रक्रिया पर आम जनता सवाल उठा रही है।

लाख से अधिक की आबादी प्रभावित, दैनिक यात्रियों और छात्रों की बढ़ी परेशानी

सलगाझुड़ी स्टेशन के बंद होने के बाद से टेल्को, गोविंदपुर, राहरगोड़ा, बारीगोड़ा, सोपोडेरा, गदरा, महतोडीह और नरवा माइंस क्षेत्र की लगभग एक लाख से अधिक आबादी इसी हाल्ट पर निर्भर थी। रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों को अब टाटानगर स्टेशन पहुंचने के लिए ऑटो इत्यादि से अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा है, जिससे गरीब कामगारों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

अन्य छोटे हाल्टों पर ठहराव जारी, स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

टाटा-खड़गपुर रेलखंड के अंतर्गत आने वाले चिरूगोड़ा, बानसतोला, कानीमहुली और खटकूड़ा जैसे कम यात्री दबाव वाले हाल्टों पर पैसेंजर ट्रेनों का संचालन नियमित रूप से जारी है। ऐसे में इस सघन आबादी वाले औद्योगिक उपनगरीय क्षेत्र में ट्रेनों का ठहराव न होना रेलवे की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न लगाता है।