मुंबईसमाजसेवी अन्ना हजारे को लगभग 10 दिनों के उपचार के बाद गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल से बाहर आते ही उन्होंने अपनी सेहत का हाल साझा किया और कहा कि उनका काम अभी समाप्त नहीं हुआ है। 90 वर्ष की अवस्था में भी उन्होंने देश और जनता की सेवा 100 साल की उम्र तक करने का संकल्प दोहराया।

अन्ना ने कहा कि वह अब पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी का अधिकांश समय निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में लगाया है और जीवन की अंतिम सांस तक जरूरतमंदों की मदद करते रहना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें धन-दौलत या बैंक बैलेंस की कोई चाहत नहीं है, जनता की निस्वार्थ सेवा ही उनके लिए सच्ची पूजा है।

संक्रमण और निर्जलीकरण के कारण भर्ती हुए थे अन्ना

बॉम्बे अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौतम भंसाली ने बताया कि शुरुआत में अन्ना हजारे को वायरल बुखार और दस्त की शिकायत के बाद शिरूर के स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया था। डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण उन्हें पेशाब से संबंधित समस्या हुई और शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ गया। जांच में मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूरिन इन्फेक्शन) की पुष्टि होने पर बेहतर इलाज के लिए उन्हें मुंबई स्थानांतरित किया गया, जहां 10 दिनों के सघन इलाज के बाद उनकी स्थिति सामान्य हुई।

रालेगण सिद्धि को बनाया आत्मनिर्भरता की मिसाल

भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के संवाहक रहे अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि गांव को जल संरक्षण, वृक्षारोपण, व्यसनमुक्ति और आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बनाकर देश भर में पहचान दिलाई। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 100 वर्ष की आयु तक समाज सेवा में समर्पित रहने की उनकी जिजीविषा ने एक बार फिर समर्थकों और देशवासियों को प्रेरित किया है।