देश में बच्चा गोद लेने की तीन से पांच साल तक की वेटिंग, 35 हजार से अधिक अभिभावक कतार में
दिल्ली। बच्चा गोद लेने के लिए देश में इस समय तीन से पांच साल तक की वेटिंग चल रही है। बच्चा गोद देने वाली केंद्रीय एजेंसी केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) पर वर्तमान में 30 से 35 हजार अभिभावक लंबित सूची में हैं, लेकिन गोद लेने वाले बच्चों की संख्या मात्र 2200 से 2500 तक है।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष जेपी भद्रदास का कहना है कि आजकल बच्चे वैसे ही कम हो रहे हैं, इसके बाद सभी को शून्य से दो साल तक के बच्चे ही चाहिए तो सूची तो लंबी होनी तय है। कम उम्र के बच्चे आसानी से एडजस्ट हो जाते हैं, इसलिए इनकी मांग अधिक है। इससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए लंबित सूची कम है, लेकिन अभिभावक उनमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाते। वर्तमान में कम से कम साढ़े तीन साल का वेटिंग समय तय है। कारा पर करीब 35 हजार अभिभावक बच्चा गोद लेने की कतार है, जबकि बच्चे केवल 2200 ही हैं। उनका कहना है कि बच्चा गोद लेने के लिए पहले आपको इस साइट पर पंजीकरण कराना होता है। उसके बाद की आगे की र्कारवाई शुरू होती है। इस साइट पर देशभर के इच्छुक लोग पंजीकरण करा सकते हैं और किसी भी राज्य या जिले से बच्चा गोद ले सकते हैं।
जिले में भरत पुरिया शिक्षा समिति घरौंदा बाल आश्रम का संचालन करती है। जिसमें कुल 33 बच्चे हैं। यहीं पर घरौंदा दत्तक ग्रहण अभिकरण बच्चों को गोद देने का कार्य करती हैं। यहां वर्तमान में 12 बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया में शामिल हैं। जिसमें से चार बच्चों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बचे 8 बच्चों में से दो स्पेशल चाइल्ड हैं। ऐसे में छह बच्चों के लिए गोद लेने वाले 105 अभिभावकों की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 371 अभी लंबित प्रकिया में हैं। इस प्रकार कुछ छह बच्चों के लिए कुल 476 अभिभावक कतार में हैं। घरौंदा की इंचार्ज कनिका कहती हैं कि वेटिंग लिस्ट तीन से पांच साल तक की चल रही है। स्पेशल चाइल्ड को लेने तो शायद ही कोई आगे आता हो। ऐसे में फिलहाल 6 बच्चों के लिए अभिभावकों की लंबी सूची है। उनका कहना है कि गोद लेने वालों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। 2023 में संस्था ने 12, 2024 में 15 और 2025 में सर्वाधिक 29 बच्चे गोद दिए। इस साल की प्रक्रिया चल रही है। बच्चे बेहद कम हैं और अभिभावक अधिक।
बच्चा गोद लेेने की प्रक्रिया
सबसे पहले कारा पोर्टल पर जाकर भावी माता-पिता के रूप में अपना खाता बनाकर फॉर्म भरना होता है। दस्तावेज अपलोड करने के बाद पंजीकरण के 30 दिनों के भीतर पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, आय प्रमाण, विवाह प्रमाण पत्र और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अपलोड करना होता है। इसके बाद होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाती है। जिसमें एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता या एजेंसी घर का दौरा करके यह जांच करती है कि माहौल बच्चे के लिए सुरक्षित है या नहीं। रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद वरिष्ठता और पसंद के आधार पर बच्चों के प्रोफाइल (रेफरल) दिखाए जाते हैं। बच्चा मिलने और अस्थायी देखभाल के बाद, कोर्ट में याचिका दायर की जाती है और आदेश मिलने पर प्रक्रिया पूरी होती है।
कौन ले सकता है गोद
शादी के दो साल बाद शारीरिक, आर्थिक रूप से संपन्न दंपती बच्चा गोद ले सकते हैं। भावी माता-पिता शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से स्थिर होने चाहिए। उन्हें कोई जानलेवा बीमारी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा एक अकेली महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है, जबकि एक अकेला पुरुष केवल लड़का गोद ले सकता है।
60 दिनों के अंदर वापस लाए जा सकते हैं
जेपी भद्रदास का कहना है कि समिति दो साल तक लगातार बच्चे की निगरानी करती है। इसके अलावा 60 दिन के लिए बच्चे अस्थायी देखभाल के लिए दिया जाता है। इस समय पीरियड में बच्चा वापस लाया जा सकता है या माता-पिता उसे वापस कर सकते हैं। बड़ी उम्र के कई बच्चे वापस आए हैं। पिछले एक साल में पांच हजार से अधिक बच्चे गोद दिए अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक देश में 5022 बच्चे गोद दिए गए। जिसमें से 4603 बच्चे देश और 419 बच्चों को विदेश में गोद दिया गया।
असल में आंकड़ा कई गुना अधिक
अधिकारियों की मानें तो गोद लेने वाले अभिभावक दो प्रकार के होते हैं। एक जिनकी कागजी कार्रवाई पूरी हो गई और दूसरी जो अभी प्रोसेस में हैं। 30 से 35 हजार की कार्रवाई तो पूरी हो चुकी है। इसके अलावा अभी 10 से 15 हजार से अधिक प्रोसेस में चल रहे हैं। इस प्रकार यह संख्या काफी अधिक है।