अंबाला | नेशनल हाईवे-44 और 152 के संगम पर स्थित देवीनगर फ्लाईओवर पर दो रहस्यमयी सीसीटीवी कैमरे मिलने से हड़कंप मच गया है। इन कैमरों के जरिए देश की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ खिलवाड़ की आशंका को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात तत्वों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 (देश की एकता-अखंडता को खतरा) और 61 (साजिश) के तहत यह कार्रवाई अमल में लाई गई है।

इत्तेफाक से हुआ बड़ा खुलासा

इस जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ तब हुआ जब एएसआई रविश कुमार 15 फरवरी को एक सड़क हादसे की तफ्तीश के लिए मौके पर पहुंचे थे। वहां पुल पर लगे कैमरों को देखकर उन्हें संदेह हुआ। हैरानी की बात यह रही कि NHAI, टोल प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस समेत किसी भी विभाग ने इन कैमरों को अपना मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद अधिकारियों के आदेश पर इन कैमरों को जब्त कर लिया गया।

हाईटेक सेटअप और सिम कार्ड बरामद

जांच में पता चला कि इन कैमरों को चलाने के लिए किसी बाहरी बिजली कनेक्शन की जरूरत नहीं थी; इन्हें लकड़ी के तख्तों और सोलर प्लेटों के जरिए बिजली दी जा रही थी। पुलिस को एक कैमरे से VI कंपनी का सिम कार्ड भी मिला है, जिसका इस्तेमाल संभवतः लाइव डेटा ट्रांसमिशन के लिए किया जा रहा था। दूसरा कैमरा बिना सिम के पाया गया है। पुलिस अब इस डेटा के 'रिसीवर' तक पहुंचने के लिए बैकअप की बारीकी से जांच कर रही है।

रणनीतिक ठिकानों पर नजर की आशंका

अंबाला अपनी भौगोलिक और सैन्य स्थिति (राफेल तैनात एयरफोर्स स्टेशन और सेना की यूनिट्स) के कारण हमेशा से संवेदनशील रहा है। अप्रैल में भी दिल्ली पुलिस ने मलौर गांव से ऐसा ही एक जासूसी कैमरा बरामद किया था। आशंका जताई जा रही है कि कोई बाहरी एजेंसी या देशद्रोही तत्व इन कैमरों के जरिए गुप्त जानकारी जुटाने की फिराक में हैं।