गाजियाबाद। हरीश राणा का मंगलवार शाम चार बजकर 10 मिनट पर निधन होने के बाद बुधवार सुबह नौ बजे उनको दिल्ली के ग्रीन पार्क में नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान राज एम्पायर सोसायटी से भी काफी संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद हरीश को 14 मार्च को एम्स में भर्ती कराया कराया गया, जहां उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के बाद 24 मार्च को उनको 13 साल की पीड़ा से मु​क्ति मिल गई। इस दौरान उनका का​र्निया और हृदय के वॉल्व परिवार ने दान कर दिए, जिससे दुनिया से जाते-जाते हरीश कई जिदंगियों को रोशन कर गए। 
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान 21 अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए वह पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित बताया। इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी। जिसकी प्रक्रिया के लिए उन्हें 14 मार्च को एम्स में भर्ती कराया गया, जहां 10 दिन बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। यह देश का पहला ऐसा मामला था। यह परिवार के लिए बेहद भावुक पल रहा। परिवार ने 13 साल तक हर जगह इलाज कराया, मथ्था टेका, लेकिन कहीं उम्मीद नजर न​हीं आने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें पीड़ा से मु​क्ति दिलाने की मंजूरी मिल गई।

दुनिया से विदा होकर भी कइयों को दे गए जिंदगी
दुनिया से विदा होने के बाद भी हरीश कइयों को जिंदगी दे गए। उनके माता-पिता ने बेटे के अंगदान का फैसला किया, जिसने नई मिसाल पेश कर दी। एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि जांच के बाद हरीश का हृदय, किडनी व लिवर दान नहीं हो सकता था, लेकिन परिवार की सहमति से दोनों कॉर्निया व हृदय के चारों वाल्व लेकर सुरक्षित रख दिए गए हैं। इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपा गया। परिजनों ने हर क्रियाशील अंगों को दान करने की इच्छा जताई थी, जांच के बाद स्वस्थ अंग ही निकाले गए।

कब क्या-क्या हुआ
-20 अगस्त 2013: हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल
-वर्ष 2022: माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की
-8 जुलाई 2024: हाई कोर्ट ने इच्छामृत्यु याचिका खारिज की
-15 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
-11 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति दी
-14 मार्च 2026: हरीश को एम्स, दिल्ली में भर्ती कराया गया
-24 मार्च 2026: एम्स में निधन