इच्छामृत्यु के लिए एम्स पहुंचे हरीश राणा, अब धीरे-धीरे हटाया जाएगा लाइफ सपोर्ट सिस्टम
गाजियाबाद। सुप्रीम कोर्ट की ओर से निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद राजनगर एक्सटेंशन की राज एंपायर सोसायटी से हरीश राणा का परिवार शनिवार सुबह आठ बजे उन्हें एम्स लेकर पहुंंच गया। जहां अंगदान के लिए पहले सभी अंगों की जांच की जाएगी। उसके बाद एक-एक करके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाया जाएगा, ताकि वह प्राकृतिक तरीके से चिरनिद्रा में सो सकें। यह पूरी प्रक्रिया एम्स की डॉक्टरों की देखरेख में संपन्न होगी।
हरीश के पिता अशोक राणा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर डॉक्टरों की टीम बनाई जा चुकी है। उनकी देखरेख में सभी जांच के बाद लाइफ सपोर्ट सिस्टम एक-एक करके हटाया जाएगा और हरीश को ईश्वर की गोद में छोड़ दिया जाएगा। इस वक्त में हम शांति चाहते हैं और चाहते हैं कि लोग हमारी निजता का सम्मान करें। हम सब बेहद दुखी हैं। सूत्रों की मानें तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी दिल्ली में पूरी किए जाने की संभावना है।
क्या है निष्क्रिय इच्छामृत्यु
यह तब लागू होता है जब मरीज परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (पीवीएस) में हो, ठीक होने की कोई संभावना न बची हो और वह सिर्फ आर्टिफिशियल फीडिंग या हाइड्रेशन पर जिंदा रखा जा रहा हो। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के कॉमन कॉज फैसले में इसे आर्टिकल 21 के तहत राइट टू डाई विद डिग्निटी का हिस्सा माना। 2023 में प्रक्रिया आसान की गई, जिसमें दो मेडिकल बोर्ड्स की रिपोर्ट, कोर्ट कम हस्तक्षेप निर्धारित किया गया। अदालत ने क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन एंड हाइड्रेशन (सीएएनएच) हटाने की अनुमति दी है। यह प्रक्रिया एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर विभाग में होगी।
पढ़ाई के दौरान चौथी मंजिल से गिरे थे
हरीश राणा 21 अगस्त 2013 को चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान चौथी मंजिल से गिरे थे। गंभीर ब्रेन इंजरी से उन्हें 100 फीसदी क्वाड्रिप्लेजिया हो गया। तब से वह कोमा में हैं। पिछले 13 सालों में कोई उम्मीद नहीं दिखने के कारण परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, लेकिन उसके खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां से प्राकृतिक तरीके से मौत की मंजूरी मिली।
बेटे के अंतिम समय में शांति से रहना चाहना है परिवार
हरीश को वर्तमान में परक्यूटेनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टोमी (पीईजी) ट्यूब के माध्यम से जीवनरक्षक उपचार दिया जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद इसे बंद कर दिया जाएगा। उन्हें उपशामक व आरामदेह देखभाल दी जाएगी, ताकि प्रकृति अपना कार्य कर सके। इसके लिए हरीश को दिल्ली स्थित एम्स ले जाया गया है।
चार लोगों को मिल सकता है जीवन
हरीश के कॉर्निया, लिवर, किडनी और फेफड़ों को दान देने की तैयारी है। इससे पहले सभी अंगों की जांच की जाएगी। इन अंगों से चार लोगों को जीवनदान मिल सकता है।