32 प्रकार के फूलों से महक रहा नीना का घर, 45 सालों से कर रहीं बागवानी
- चीकू, सौंफ, इलायची सहित सलाद वाले इटालियन पौधों की भरमार
- पर्यावरण को स्वच्छ बनाने वाले ढेरों पौधों की प्रजाति भी है लगाई
गाजियाबाद। कविनगर के एफ ब्लॉक में रहने वाली नीना गोयल का घर इस समय 32 प्रकार से अधिक प्रकार के फूलों से महक रहा है। गेट खोलते ही रंग-बिरंगे फूल देखते ही आपका मन खुश हो जाएगा और आप बेहद सुकून का अनुभव करेंगे।
67 साल की नीना पिछले 45 सालों से बागवानी कर रही हैं। उन्हें इसका शौक बचपन से था। दिल्ली की रहने वाली नीना शादी के बाद जब गाजियाबाद आईं तो यहां उन्हें बड़े घर में इस शौक को बढ़ाने का मौका मिल गया। वह कहती हैं कि उन्हें इस काम में बहुत सुकून मिलता है। कोरोना के समय उन्होंंने कई नए-नए प्रकार के पौधे लगाए और अपने लॉन के कोने-कोने को पौधों से भर दिया। उनके लॉन में पर्यावरण को शुद्ध करने वाले एरिका पाम, स्नेक प्लांट, स्पाइडर, फर्न, एग्लोनिमा, मनी प्लांट सहित ढेरों पौधे हैं। सौंफ, ब्रोकली, इलाचयी, बैंगन, बंदगोभी, फूलगोभी, टमाटर सहित सलाद में प्रयोग होने वाले इटालियन पासले, बेजल, स्टॉक, चेरी आदि भी लगे हुए हैं। इस समय चीकू खूब लगे हुए हैं, जो कुछ समय बाद पकने शुरू हो जाएंगे। नीना कहती हैं कि पूरे साल उनका लॉन फूलों से महकता रहता है। अब गर्मियों में लगने वाले फूलों के बीज डालने भी शुरू कर दिए हैं। वह नोएडा फ्लाॅवर शो में ट्रे गार्डनिंग में पहला पुरस्कार जीत चुकी हैं। वह कहती हैं कि अब बढ़ती उम्र के साथ भाग तो नहीं ले पाती। पहले गाजियाबाद और नोएडा शो में हमेशा लेती हैं, लेकिन देखने जरूर जाती हैं और नए वैरायटी की जानकारी लेकर आती हैं। उन्हें ट्रे गार्डनिंग का बहुत शौक है।

इस समय खिले फूल
टयूलिप, जरबेरा, डाइनएथिस, पैंजी, डेटेज रोज, सैंकुलेट, कैंलेनडुला, डहेलिया, रेनीकुलश, पिटूनिया, गुलाब, जेरेनियम, सालविना, डॉग फ्लावर, वरविना, एस्टर, झुुमका फ्लार यानी अरेलिया, एसिशम, फ्लॉक्स, डैफोडिल, स्नोड्रॉप, विंटर एकोनाइट, गुलदावरी, कुल्हड़, डीपोर्फो आदि फूल शामिल हैं। पिटुनिया और पहाड़ों पर खिलने वाले रेनीकुलश फूल दिवाली से अप्रैल तक खिलते हैं, इसलिए इन फूलों की संख्या अधिक है।
प्रीति के प्रयास से आर्गेनिक सब्जियों से बन रहा स्कूल में पौष्टिक मीड-डे-मील
प्राथमिक विद्यालय सिहानी-3 में अगर आप जाएं तो आपको पालक, टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी, हरिमिर्च, धनिया की खेती नजर आएगी। बच्चों का मीड-डे-मील इन्हीं आर्गेनिक सब्जियों से पौष्टिक बन रहा है। यहां की मुख्याध्यापिका प्रीति सक्सेना इसके लिए बहुत मेहनत करती हैं। हार्टीकल्चर और फ्लोरीकल्चर सोसायटी की ओर से उन्हें समय-समय पर गाइड भी किया जाता है। वह कहती हैं कि उन्होंने गर्मियों की सब्जी लौकी, भिंडी, तोरी, खीरा, करेला के बीच भी डाल दिए हैं। प्रीति कहती हैं कि कई बच्चों के पिता किसान हैं तो बच्चे भी काफी कुछ सिखाते हैं। बंदरों अधिक होने के कारण गाजर, गोभी तो काफी बर्बाद हो गए लेकिन पालक, मूली, धनिया, पालक और टमाटर खूब हुए। बच्चों के खानों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
