- पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्डधारक के नए स्वयं सहायता समूह बनाए जाएंगे

- राज्य ग्रामीण रोजगार योजना के तहत आत्मनिर्भर बनाने का उद्देश्य
गाजियाबाद। जिले की 66 हजार से अधिक महिलाओं को राज्य ग्रामीण रोजगार योजना के तहत आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इन्हें नए स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्डधारक महिलाएं ही पात्र होंगी।
अभी तक जिले में करीब 2500 हजार स्वयं सहायता समूह हैं, जो विभिन्न प्रकार के कुटीर उद्योग सहित कई अन्य कार्य कर रहे हैं। इनकी संख्या अब बढ़ाई जाएगी। अब नए स्वयं सहायता समूह बनाए जाएंगे, जिसकी लाभार्थी केवल पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्डधारक महिलाएं ही होंगी। इस समय जिले में 66852 महिलाएं कार्डधारक हैं। जिनको नए समूहों से जोड़ा जाएगा।

इस संबंध में रजापुर ब्लॉक मिशन प्रबंधक अतुल कुमार सिंह का कहना है कि इन महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव में जाकर महिलाओं का समूह बनाया जाएगा। उसके बाद उनको प्रशिक्षण और पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वह अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें।
कैसे बनता है समूह

गांव स्तर पर प्रधान और सचिव के माध्यम से इच्छुक महिलाओं का 10 से 12 महिलाओं का ग्रुप बनाया जाता है। इसके बाद स्वयं सहायता समूह के रूप में पंजीकृत किया जाता है। अगर कोई कोर्स आता है तो वह कराया जाता है अन्यथा समूह की महिलाओं की इच्छानुसार आवासीय तीन, पांच, सप्ताह या महीनेभर का प्रशिक्षण रूजमेट में दिया जाता है।
क्या है प्रावधान

समूह बनने के बाद जरूरी सामान के लिए सरकार की ओर से 2500 रुपये की राशि दी जाती है। तीन महीने बाद 30 हजार रुपये का रिवीलिंग फंड दिया जाता है। यह एक प्रकार की सुरक्षा राशि है। समूह खत्म होने पर यह लौटानी पड़ती है। छह महीने बाद व्यवसाय बढ़ाने के लिए डेढ़ लाख रुपये की सामुदायिक निवेश निधि एक प्रतिशत ब्याज पर दी जाती है। अगर कोई महिला समूह से पैसे उधार लेती है तो उसे एक प्रतिशत ब्याज से पैसा दिया जाता है।