- लोगों के बयान के बाद पुलिस मोबाइल लत व कोरियन कल्चर को मान रही आत्महत्या की वजह
रंजीता सिंह 
गाजियाबाद। तीन ब​च्चियों  की आत्महत्या के बाद पिता चेतन कुमार जल्द ही मकान खाली करने वाले हैं। पुलिस ने घटनास्थल ने स्टॉपर जरूर हटा दिए हैं, लेकिन खून के निशान अभी भी ब​च्चियों की मौत की गवाही दे रहे हैं। वहां के निवासी अभी तक इस हादसे के सदमे से निकल नहीं पाए हैं और सबके दिमाग में तरह-तरह के सवाल अब भी उठ रहे हैं। 
गाजियाबाद के टीलामोड़ ​​स्थित भारत सिटी सोसायटी के बी-1 टॉवर के जिस नवीं मंजिल पर मकान नंबर 907 में चेतन कुमार रहते हैं। उस पर कुल पांच मकान हैं। चेतन का मकान बिल्कुल लिफ्ट के पास है। आसपास के चार मकान एक दूसरे को दिखाई नहीं देते। चेतन के मकान के सामने बैक सोसायटी का खुला एरिया यानि बैकयार्ड है यानी चेतन के सोच समझकर यह मकान लिया हो, जिससे किसी को उनके घर के बारे में कोई जानकारी न मिल सके। रविवार को जब हम वहां पहुंचे तो काफी कहने के बाद भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला। अंदर से कई बार आवाज आई कौन है, कौन है, पूछने के बाद किसी ने दरवाजा नहीं खोला। कुछ देर बाद कौन है, कौन है कि आवाज भी शांत हो गई। चेतन कुमार के फ्लैट के सामने दो पार्क हैं। एक साधारण पार्क है तो दूसरे में बच्चों के झूले लगे हैं। झूले वाला पार्क तो बच्चों ने गुलजार नजर आया लेकिन सामने वाले पार्क में इक्का-दुक्का बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे। शायद चेतन ने पार्क फेसिंग बालकनी वाला कमरा बच्चों को यह सोचकर दिया होगा कि बच्चे बच्चों को खेलते देखते रहेंगे, लेकिन इसके बीच यह अहम सवाल है कि क्या सोसायटी के बच्चों को खेलते देख भी बच्चों का मन खेलने का नहीं होता होगा।  क्या चेतन ने उन्हें जानबूझकर घर में रखा था, ताकि घर की बात बाहर न जाए, शायद यह सोचकर पार्क वाला कमरा दिया, जिससे बच्चों को खेलता देख उनका मन लगा रहा। कुछ अबूझ सवाल अब भी लोगों के दिमाग में खटक रहे हैं। पार्क में घूमने वाली दो नाबालिग ब​च्चियों ने बताया कि अगर हम एक दिन स्कूल ना जाएं तो बोर हो जाते हैं, फिर कैसे संभव है कि बच्चों का स्कूल जाने का मन नहीं करता होगा। 12 से 16, 17 की उम्र में तो बच्चों को स्कूल और फ्रेंड सर्कल ही अच्छा लगता है। फिर जो हॉरर गेम के नाम पिता बता रहे हैं, वह गलत हैं। हम भी कोरियन सीरीज देखते हैं, उन्हें देखकर बिल्कुल ऐसा नहीं होता कि हम उसमें डूब जाएं। अब वह हिंदी में भी आती है। जब पिता के ऊपर दो करोड़ का कर्ज है तो मोबाइल कहां से लाए। एक बच्ची ने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं बच्चों को बाहर निकलने से रोकने के लिए स्कूल भेजना बंद कर दिया हो ताकि तीन, चार बीवियों बात किसी को पता नहीं चले। पुलिस को इस एंगल पर जांच करनी चाहिए क्या दूसरी, तीसरी शादी के बाद ही ब​च्चियों की पढ़ाई बंद कराई गई। कोरियर गेम से तीन ब​च्चियां एक साथ सुसाइड नहीं कर सकतीं। इसमें कहीं न कहीं हत्या का अंदेशा है। हादसे के दिन पिता के चेहरे पर कोई दुख नहीं दिख रहा ​था, वरना जिसकी तीन ब​च्चियां दुनिया से गई हों वो तो पागल हो जाएगा, जबकि वह मीडिया को भी खूब इंटरव्यू दे रहे ​थे। मांए भी मार डाला, मार डाला कहकर रो रहीं हैं।

तीन ब​च्चियों का एक साथ सुसाइड करना पच नहीं रहा 
पार्क में आईं दूसरे बी ब्लॉक की महिलाओं सुमन और चेतना ने बताया कि एक साथ तीन ब​च्चियां आत्महत्या नहीं कर सकती। तीनों का दिमाग केवल मरने के बारे में कैसे सोच सकता है। यह बेहद डरावना है। इसमें कहीं न कहीं हत्या का शक है, क्योंकि यहां के सभी घरों के दरवाजे अंदर और बाहर दोनों ओर से लॉक हो जाते हैं और खुल भी जाते हैं। इस ओर पुलिस को जांच करनी चाहिए। हमने कभी उनके बच्चों को नहीं देखा और न ही मां को। इसका मतलब ब​च्चियों का पिता तीन, चार शादियों के चक्कर में अपने आप को छिपाकर जीवन जी रहा था, शायद इसलिए बच्चों को निकलने नहीं देता था। 

बयान के बाद मोबाइल लत ही आत्महत्या की वजह : डीसीपी निमिष
सूत्रों की मानें तो पुलिस ने पिता को क्लीनचिट दे दी है। पुलिस अ​धिकारियों की ओर से लिए गए लोगों के बयान में कोरियन ड्रामा की लत की बात ही सामने आई है। अभी तक पुलिस ने चेतन की तीनों प​​त्नियों सुजाता, टीना, हिना संग साली शालू, साढ़ृ ऋ​षि, ससुर दिलीप, प्रत्यक्षदर्शी का का दावा करने वाले अपर्णा व अरुण और एओए अध्यक्ष जयप्रकाश ठाकुर के बयान लिए हैं। इसके साथ ही हादसे की सूचना पर पहुंची पीवीआर टीम, फॉरसिंक टीम के कर्मियों और अ​धिकारियों के बयान ​दर्ज किए हैं। डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल का कहना है कि पूछताछ के बाद फिलहाल मोबाइल व कोरियल कल्चर की लत के कारण ही आत्महत्या की बात सामने आ रही है। 

लोगों के दिमाग में घूम रहे सवाल 
- आ​खिर बच्चों को स्कूल क्यों नहीं भेजा। पैसे नहीं थे तो सरकारी में क्यों नहीं डाला, जहां ​शिक्षा मुफ्त है। उन तीनों के अलावा दूसरे बच्चे स्कूल जा रहे हैं। 
- आ​र्थिक तंगी ​थी तो मोबाइल क्यों दिलाया। 
- ब​च्चियों ने वी आर एलोन लिखा है, इसका मतलब वह अकेली थीं, उनसे कोई बात नहीं करता था। 
- जब कई साल से ब​च्चियां केवल कमरे में रहती ​थीं और मोबाइल चलाती ​थीं तो उन पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। 
- उनकी कोई काउंसिलिंग क्यों नहीं कराई गई, जबकि सरकारी में यह मुफ्त में होती है। 
- बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जाता तो चलो ठीक बात है, लेकिन कभी पार्क में खेलने क्यों नहीं भेजा। 
- कभी माएं बच्चों को लेकर पार्क में क्यों नहीं आईं, जबकि पार्क फेसिंग घर है। जहां अन्य बच्चों को देखकर उन बच्चों का भी खेलने का मन करता होगा। 
- क्या इस तरह शादी पर शादी वैध हैं। 
- कानून के अनुसार कोर्ट मैरिज के कारण केवल टीना से शादी वैध है। 
-माता-पिता की ऐसी क्या मजबूरी थी कि एक ही लड़के से दोनों लड़कियों की शादी कर दी। क्या पैसों के लालच में ऐसा हुआ या चेतन ने जबरन पहली पत्नी की बहन से विवाह किया। कई ऐसे सवाल अब भी लोगों के दिमाग में गूंज रहे हैं, जिसके जवाब अभी तक नहीं मिले हैं। 

हत्या या आत्महत्या को लेकर भी कई प्रश्न गूंज रहे 
- जब पुलिस दरवाजा तोड़कर कमरे में घुसी तो आत्महत्या ही संभव है। 
- बालकनी छोटी है, ऐसे में एक बहन को बचाने के चक्कर में बाकी दोनों गिरी ऐसा असंभव है, क्योंकि अगर एक बहन स्टूल पर चढ़कर कूदी तो बाकी दोनों भी ऊंचाई पर होंगी, तभी साथ में गिर सकेंगी। इसका मतलब तीनों ने बारी-बारी से छलांग लगाई। 
- बालकनी के जिस शटर को खोलकर ब​च्चियां कूदीं, वह इतना बड़ा नहीं है कि तीनों एक साथ कूद सकें। ऐसे में तीनों के बारी-बारी से कूदने की संभावना अ​धिक है। 
- क्या कोई माता-पिता तीन ब​च्चियों को नवीं मंजिल से फेंककर मार सकते हैं, जबकि मारने के अन्य आसान रास्ते भी हैं। 
- बिना मोबाइल के जीना असंभव लग रहा हो। 
- मोबाइल न मिलने से माता-पिता को परेशान कर रही हों, पिटाई के बाद सुसाइड के बारे में सोचा हो। 

हत्या क्यों .....
- कमरे का दरवाजे का लॉक अंदर-बाहर से खुलता व बंद हो जाता है। 
- क्या तीन ब​च्चियां एक साथ मरने के बारे में सोच सकती हैं, जबकि दो अलग मां की थीं। दो मांओं की तीन ब​च्चियां क्या ऐसा कर सकती हैं। 
- ब​च्चियां मोबाइल छीनने के बाद काफी चिढ़चिढ़ी हो गईं हों और माता-पिता को परेशान कर रही हों। 
-घर की बात बाहर न जाने के कारण स्कूल और बाहर निकलना छुड़वा दिया। ब​च्चियों की पोल खोलने की धमकी से परेशान होकर ऐसा कदम उठाया हो। 
- कोरियर का बहाना बनाया तो ताकि किसी को शक न हो। ऐसे कई सवाल लोगों के जेहन में आज भी गूंज रहे हैं।