गाजियाबाद। सॉरी पापा, आई एम रियली सॉरी, यह शब्द गाजियाबाद की उन तीन मासूम बेटियों के सुसाइड नोट के हैं, जिन्होंने ऑनलाइन गेम की लत के चलते नौवीं मंजिल की अपनी बालकनी से कूदकर जान दे दी। तीन नाबालिग बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) की मौत की इस दर्दनाक घटना ने देश को झकझोर दिया है। तीन बहनों की खुदकुशी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। जांच में भारत सिटी सोसायटी के फ्लैट नंबर 907 के पूजा घर की दीवारें टूटते मन और अकेलेपन की गवाही दे रहीं हैं। 
दीवारों पर जगह-जगह आकृतियां और स्लोगन लिखे हैं। फर्श पर फोटो बिखरे मिले हैं। किशोरियां अधिकांश समय एक ही कक्ष में बिताती थीं। पूजा घर की दीवारें अब तीन बहनों के टूटते मन और अकेलेपन की खामोश की गवाही बन गया है। तीनों किशोरियों ने जिस खिड़की से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त की, उस कमरे की दीवारें उनके अंतर्मन में चल रहे संघर्ष को बयां करती हैं। 
दीवारों पर बने क्रॉस के निशान ऐसे हैं, मानो किसी ने बार-बार खुद को समझाने या संभालने की कोशिश की हो और हर बार असफल होकर उन्हें मिटा दिया हो।

फर्श पर तीनों किशोरियों के बचपन की तस्वीरें बिछी मिलीं
इसी पूजा कक्ष की फर्श पर तीनों किशोरियों के बचपन की तस्वीरें बिछी मिलीं। मासूम मुस्कान, पिता के साथ बिताए पल और परिवार के साथ खिंची यादगार तस्वीरें मानो जिंदगी के उन पन्नों को आखिरी बार देख लेने की चाह हो। 

दीवारों पर लिखे मिले स्लोगन
दीवारों पर लिखे स्लोगन मेक मी ए ब्रोकन हार्ट, आई एम अलोन उन भावनाओं को उजागर करते हैं, जिन्हें शायद वे किसी से कह नहीं सकीं। भारत सिटी सोसायटी के बी-1 टॉवर स्थित चेतन कुमार के फ्लैट में दाखिल होते ही दाहिने हाथ पर उनकी दूसरी पत्नी हिना का कमरा है।

तीनों बहनों का पूजा कक्ष में बीतता था अधिकांश समय
सामने पहली पत्नी सुजाता का कमरा और उससे सटा हुआ पूजा कक्ष। यहां परिवार के सभी सदस्यों का आना-जाना था, लेकिन तीनों बहनों का अधिकांश समय यहीं बीतता था। यही कमरा उनके सुकून की जगह था और विदाई का रास्ता भी बना।
हादसे के बाद जब पुलिस की फील्ड यूनिट ने पूजा कक्ष का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, तो जलती हुई आर्टिफिशियल एलईडी लाइटें और बिखरी तस्वीरें देख कुछ पल के लिए ठिठक गई। यहीं एक पॉकेट डायरी भी मिली, जिसमें दर्ज शब्द किशोरियों के भीतर के अकेलेपन और मानसिक उथल-पुथल की ओर इशारा करते हैं।

स्टूल पर चढ़कर निकाला खिड़की का शीशा
जिस खिड़की से कूदकर तीनों बहनों ने जान दी, वह फर्श से करीब पांच फीट ऊंची है। आत्महत्या से पहले तीनों बहनों ने खिड़की पर चढ़ने के लिए प्लास्टिक का सीढ़ीनुमा स्टूल लगाया था। इसके बाद खिड़की के बीच में लगा शीशा निकालकर नीचे रखा और छलांग लगा दी।

उलझी हुई है परिवार की गुत्थी, पारिवारिक कलह भी मौत की बड़ी वजह 
चेतन कुमार ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग करते हैं। वह पिछले तीन साल से भारत सोसायटी में किराये के फ्लैट में दो पत्नियों सुजाता व हिना और पांच बच्चों के साथ रह रहे हैं। आत्महत्या करने वाली किशोरियों में से निशिका, चेतन की पहली पत्नी सुजाता और प्राची व पाखी दूसरी पत्नी हिना की बेटियां थीं। चेतन की पहली पत्नी सुजाता से कई वर्ष तक कोई संतान नहीं हुई, तो उन्होंने सुजाता की बहन यानी अपनी साली हिना से शादी कर ली। इसके कुछ ही महीने बाद सुजाता से निशिका का जन्म हुआ। दूसरी पत्नी हिना से प्राची, पाखी व एक और बेटी का जन्म हुआ। बाद में पहली पत्नी से बेटा लविश (7) पैदा हुआ, जो मानसिक रूप से कमजोर है और बोल भी नहीं सकता। सोशल मीडिया पर तीसरी बहन टीना से शादी करने की बात भी चर्चा में है, हालांकि पुलिस ने इसकी पु​ष्टि नहीं की। बताया जा रहा है कि वह भी साथ रह रही ​थी।