ये कैसा गणतंत्र.... रोड नहीं तो वोट नहीं के लगाए पोस्टर
गाजियाबाद। गणतंत्र यानि गणों की सत्ता, जनता का शासन यानि लोकतंत्र, मतलब जहां जनता के चुने प्रतिनिधि शासन करते हों। जैसे अपना देश, मगर अपने इस देश में गणतंत्र के 76 साल बाद भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव तो छोड़िए शहरों में भी बुरा हाल है। मोरटा स्थित हम-तुम रोड पर रहने वाले 15 हजार निवासियों ने सड़क न बनने से परेशान होकर अपनी सोसायटियों के गेट पर अब रोड नहीं तो वोट नहीं, के पोस्टर लगा दिए हैं। लोग अपने जनप्रतिनिधियों से बेहद नाराज हैं। यूपी में अगले साल विधानसभा के चुनाव में हैं, ऐसे में इसे लोगों की नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। इस संबंध में निवासी कई बार जीडीए अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन मिल रहा है केवल आश्वासन पर आश्वासन।
विभागीय लापरवाही के कारण यह सड़क आज तक नहीं बन सकी है। गहरे गड्ढे, टूटी सड़क, जलभराव, स्ट्रीट लाइट की कमी के कारण इस पर कई हादसे हो चुके हैं। जिसमें कई लोगों की जान जा चुकी है, तो एक दिव्यांग भी हो चुके हैं।
इस दो किमी की सड़क पर पूरे दिन नगर निगम के डंपर चलते हैं, जिनकी रफ्तार काफी तेज होती है। यह कई बार लोगों को कुचल चुके हैं। जब बिल्डर ने इसके दोनों ओर सोसायटियों में रहने वालों को फ्लैट बेचे थे, तब इस सड़क की चौड़ाई 24 मीटर बताई थी, लेकिन इसे केवल छह से सात मीटर ही बनाकर दिया। सड़क काफी पतली होने और ऊपर से गड्ढों की भरमार होने के कारण यह लोगों के लिए जानलेवा बनी हुई है।
इस रोड के दोनों ओर दीयाग्रीन, निलायाग्रीन, महक जीवन, मोती रेजीडेंसी, मिडोज विस्ता, संचार आरकेड और राजविकास सहित कुल सात सोसायटियां हैं। इन सोसायटियों में करीब 15 हजार से अधिक लोग रहते हैं। इसके साथ ही इस सड़क पर कई नामी निजी स्कूल और अन्य शिक्षण संस्थान व अन्य कार्यालय हैं। उसके बावजूद पिछले पांच सालों से यह सड़क नहीं बन सकी है। निवासी मुरारी लाल शर्मा का कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं किया गया है। हमें बार-बार पत्र लिखने में शर्म आने लगी, लेकिन अधिकारियों को नहीं आ रही है। अब हमने रोड नहीं तो वोट नहीं के पोस्टर लगाए हैं। यह सभी सोसायटियों के गेट पर लगाए गए हैं। अशोक त्यागी का कहना है कि बारिश के बाद कहीं-कहीं पैचवर्क किया गया, लेकिन वह भी कुछ ही दिन में उखड़ गए। ललित शर्मा का कहना है कि यह कैसा विकास हो रहा है, जहां हाईवे तो बन रहे हैं लेकिन शहर के अंदर की सड़क के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं। जिले में पार्षद निधि, विधायक निधि, सांसद निधि, विकास फंड, अस्थापना राशि सहित कई प्रकार के फंड होते हैं। उसके बाद भी इसका न बनना लोगों की उपेक्षा है। अगर सड़क नहीं बनी तो यहां के निवासी विधानसभा चुनाव में वोट नहीं देंगे। रोड नहीं तो वोट नहीं।