एजेंसी। दीवार फिल्म में दो भाइयों के बीच का यह डॉयलॉग ​बड़ा फेमस है कि मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, बैंक-बैलेंस है तेरे पास क्या है... पर पिक्चर का यह हिट डॉयलॉग आज हर किसी को मुंह चिढ़ा रहा है, क्योंकि यहां यह पूछने वाला कोई भाई नहीं एक ​भिखारी है। जांच में जिसके पास बेहिसाब दौलत मिली है। इंदौर के इस ​भिखारी की संप​त्ति जानकर हर कोई हैरान हो रहा है।
मांगीलाल के पास शहर में तीन मकान, दो ऑटो रिक्शा, एक लग्जरी कार, कार चलाने के लिए 12 हजार वेतन पर इसने ड्राइवर भी रखा हुआ है। सालाना इसकी कमाई 10 से 15 लाख के बीच है। जहां इंसान पढ़-लिखकर भी इतना नहीं कमा पाता है, वहीं यह केवल भीख मांगकर कमा रहा है। यह सर्राफा बाजार में भीख मांगता है और सर्राफा व्यापारियों को दिन और सप्ताह के हिसाब से ब्याज पर पैसे भी देता है।
दरअसल इंदौर को भिक्षुक मुक्त शहर बनाने के लिए नगर निगम ने एक बड़ा अभियान चला रखा है। इसी बीच सराफा बाजार में एक भिखारी की शिकायत मिल रही थी, जो विकलांग है और पटिए पर चलकर भीख मांगता है। जब टीम ने उसे रेस्क्यू किया और उसके सामान व खातों की जांच की तो अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच में पता चला कि वह और उसका परिवार  मिलकर भीख मांगते हैं। शहर में ही भगत सिंह नगर में उसका बड़ा तीन मंजिला मकान है, जबकि शिवनगर में ही एक और बड़ा मकान भी है। रेडक्रॉस सोसाइटी में विकलांगता के तहत मिलने वाला 10 बाई 20 का मकान भी उसके पास है। केवल भीख और मकान किराए से ही उसने इतना पैसा इकट्ठा कर लिया था कि ब्याज पर पैसे देने लगा था। 
अ​धिकारियों के अनुसार मांगीलाल सराफा क्षेत्र में ही घूम कर भीख मांगता था और खासकर जो लोग सोना-चांदी खरीदने आते थे या विदेशी सराफ घूमने आते थे, उनके पास जाकर भीख मांगता था, इस वजह से उसकी अच्छी खासी कमाई हो जाती थी।