देश के सबसे साफ जिले इंदौर में गंदे पानी से मौत पर खड़े हुए कई सवाल
दिल्ली। बड़ी हैरत की बात है कि देश के सबसे स्वच्छ जिले में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां सिस्टम की लापरवाही ने मासूम जिंदगियों को लील लिया, वहीं मंत्री कैलाश विजय वर्गीय के इससे जुड़े सवालों को पूछने पर घंटा कहना और हंस कर उत्तर देना उनकी राजनीतिक कर्मठता को दर्शाता है। लगातार आठवीं बार इंदौर को 2024 में सबसे स्वच्छ जिला चुनने पर राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। इंदौर की स्वच्छता देखने के लिए भी लोग वहां घूमने जाने लगे और वहां के सिस्टम की तारीफ की, पर क्या पता था कि यही सिस्टम मासूमों को मौत की नींद सुला देगा।
यहां भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 1500 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। इसके पीछे मुख्य कारण ठेका देने में देरी, प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी में चूक ने लोगों को मौत की नींद सुला दिया। जांच एजेंसियों ने दूषित पानी का स्रोत भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य पाइपलाइन में लीकेज को माना है। पूरी संभावना है कि इसी लीकेज से सीवेज का पानी पीने के पानी की लाइन में मिल गया, जिससे पूरे इलाके में संक्रमण फैल गया और एक के बाद एक 15 लोगों ने दम तोड़ दिया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में साबित हुआ है कि लोग दूषित पानी पीने से बीमार पड़े और उनकी मौत हुई। मिली जानकारी के अनुसार भागीरथपुरा की पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए अगस्त 2025 में ही ₹2.40 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था, जिसमें गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतों का जिक्र था, लेकिन टेंडर नहीं खोला गया। इस कारण काम शुरू नहीं हो सका और न ही मरम्मत कराई गई। अब लोगों की मौत के बाद आनन-फानन में टेंडर खोला गया।
जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह नाकामी नहीं थी, लापरवाही थी। अमृत 2.0 योजना के तहत 2023-24 में इंदौर को लगभग 1700 करोड़ की परियोजनाएं मिलीं। जिसमें पैकेज-1 में 579 करोड़ रुपये इंटेक वेल, डब्ल्यूटीपी और पाइपलाइन के लिए मिले। पैकेज-2 में 424 करोड़ और पैकेज-3 और 4 में 400 करोड़ मिले। जिसके टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। वह मानते हैं कि देरी और कमजोर निगरानी के कारण शहर के कई हिस्सों में सीवेज और पेयजल लाइनें आपस में जुड़ गईं। भागीरथपुरा में भी ऐसा होने से यह हादसा हुआ। लोगों ने कई बार इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। सरकार ने भी मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति बना दी गई है। जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। कुछ निचले स्तर के अधिकारी निलंबित कर दिए गए हैं।
इंदौर में नहीं हुआ उतना काम, जितनी हुई तारीफ
अभी कुछ दिनों पहले जब इटारसी जाना हुआ तो वहां इंदौर के लोगों से मुलाकात हु्ई। मैंने उनसे तुरंत पूछा कि वहां तो बहुत सफाई होगी, देश का नंबर वन जिला है, लेकिन वहां के निवासी का उत्तर संतोषजनक नहीं था। उन्होंने कहा कि हां ठीक है। अन्य से बेहतर है, उससे बेहतर को चंडीगढ़ है। तब मुझे लगा कि शायद दूर के ढोल सुहावने होते हैं।
अन्य जिलों का भी यही हाल
गाजियाबाद निवासी कैलाश कहते हैं कि हर शहर का यही हाल है। गाजियाबाद में भी हर तरफ गड्ढे खोद रखे हैं। काम धीमा चल रहा है। हर तरफ जाम लग रहा है।कई जगह सीवर लाइन की समस्या बनी हुई है। बरसात में हर तरफ पानी भर जाता है। काम के टेंडर या तो देरी से होते हैं या टेंडर मिलते ही काम शुरू कर दिया जाता है और फिर उसे पूरा करने में लंबा समय लगाया जाता है। हर जगह ऐसी ही लापरवाही है।